तकनीकी ऑडिट में सामने आई कमियों के बाद सरकार सख्त; घटिया सरकारी निर्माण पर अब सीधे होगी कार्रवाई, हरियाणा बनाएगा क्यूएए कानून
ऑडिट में मिली खामियों पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर गिरेगी गाज; केंद्रीय पीएसयू के निर्माण कार्य भी आएंगे गुणवत्ता जांच के दायरे में
Haryana News : हरियाणा में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर अब पहले से अधिक सख्त निगरानी होगी। क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (क्यूएए) की तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट में विभिन्न परियोजनाओं में सामने आई कमियों के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि तय मानकों से समझौता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मंगलवार को अथॉरिटी के चेयरमैन व पूर्व आईएएस राजीव अरोड़ा ने मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जहां भी निर्माण कार्यों में लापरवाही, निम्न गुणवत्ता या तकनीकी मानकों का उल्लंघन मिला है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही गुणवत्ता निगरानी को कानूनी आधार देने के लिए प्रस्तावित क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (क्यूएए) अधिनियम का मसौदा जल्द अंतिम रूप देकर विधानसभा के अगले सत्र में लाने की तैयारी भी तेज करने के निर्देश दिए।
क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी की समीक्षा बैठक में अथॉरिटी अध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने विभिन्न विभागों में किए गए तकनीकी ऑडिट की जानकारी भी अपनी रिपोर्ट में दी है। फोटो और तकनीकी साक्ष्यों के माध्यम से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निर्धारित मानकों के पालन तथा पाई गई कमियों की जानकारी दी गई। बैठक में हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, सिंचाई, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), विद्युत तथा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, लोक निर्माण (भवन एवं सड़क) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार, हरियाणा पावर यूटिलिटीज की चेयरपर्सन आशीमा बराड़ सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
केंद्रीय एजेंसियों के निर्माण भी होंगे ऑडिट के दायरे में
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य सरकार के विभागों के साथ-साथ हरियाणा में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों का भी समय-समय पर गुणवत्ता ऑडिट कराया जाए। उन्होंने विशेष रूप से सड़कों की लेयरिंग और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर फोकस करने को कहा, ताकि टेंडर में तय तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित हो सके।
डिजिटल निगरानी और थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन पर जोर
बैठक में डीपीआर और डिजाइन कंसल्टेंट की नियुक्ति, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एवं मॉनिटरिंग एजेंसियों, क्यूआर कोड आधारित परियोजना जानकारी, एचईडब्ल्यू पोर्टल और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से तकनीकी ऑडिट को जोड़ने, समान मूल्यांकन प्रणाली लागू करने तथा इंजीनियरिंग अनुबंधों से आर्बिट्रेशन क्लॉज हटाने की प्रगति की समीक्षा भी की गई। मुख्यमंत्री ने इन व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीडब्ल्यूडी व मार्केटिंग बोर्ड सहित विभिन्न विभागों में एसडीओ, जेई और अन्य तकनीकी पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने को भी कहा।
इंजीनियरों की ट्रेनिंग और नई गुणवत्ता नीति
बैठक में पुलों और बहुमंजिला भवनों के लिए अलग गुणवत्ता नीति, राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू), ड्रेनेज व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण शाखाओं को मजबूत करने तथा तकनीकी स्टाफ बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। अथॉरिटी ने बड़ी परियोजनाओं के लिए सोशल कॉस्ट-बेनेफिट एनालिसिस, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, गुणवत्ता आधारित भुगतान प्रणाली, हर छह महीने में हरियाणा शेड्यूल ऑफ रेट्स की समीक्षा, योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियरों का पैनल तथा गेट-योग्य यंग क्वालिटी मॉनिटर्स की भर्ती जैसे सुझाव भी दिए, जिन पर मुख्यमंत्री ने प्राथमिकता से कार्रवाई के निर्देश दिए। इंजीनियरों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का अगला चरण 5 अगस्त से शुरू होगा। पहले चरण में पंचायती राज विभाग के करीब 400 जूनियर इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद अन्य विभागों के इंजीनियरों को भी इससे जोड़ा जाएगा।

