सरकार ने 2030 खेलों की मेजबानी के लिए केंद्र को प्रस्ताव तक नहीं भेजा, दीपेंद्र बोले- कॉमनवेल्थ से हरियाणा बाहर, गुजरात को क्यों दे रहे खेलों का मैदान
3500 करोड़ में गुजरात को 600 करोड़, हरियाणा को सिर्फ 80 करोड़ मिलने का दावा, दीपेंद्र ने कहा-खेलों से लेकर डिफेंस यूनिवर्सिटी तक, हर चीज गुजरात जा रही
Haryana News : हरियाणा में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी या सह-मेजबानी का मुद्दा अब सीधे हरियाणा बनाम गुजरात की राजनीतिक बहस में बदलता दिख रहा है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि हरियाणा की भाजपा सरकार ने राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए केंद्र को कोई प्रस्ताव ही नहीं भेजा, जबकि गुजरात को लेकर प्रधानमंत्री के स्तर से घोषणा हो रही है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा देश को लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दे रहा है, ऐसे में प्रदेश को खेलों की मेजबानी से दूर रखना उसके साथ अन्याय है। मंगलवार को चंडीगढ़ में पत्रकार वार्ता में हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी के लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब से यह सामने आया है कि हरियाणा सरकार ने 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के मेजबान या सह-मेजबान के रूप में प्रदेश को शामिल करने का कोई प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा।
उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मांग की कि वह केंद्र सरकार को पत्र लिखकर हरियाणा में कॉमनवेल्थ गेम्स कराने की मांग करें। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस के सभी सांसद उस पत्र पर हस्ताक्षर करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में प्रस्तावित 2029 वर्ल्ड पुलिस गेम्स भी अब अहमदाबाद में प्रस्तावित किए जा रहे हैं। आईपीएल और टी-20 जैसे बड़े खेल आयोजनों के लिए भी अहमदाबाद का नाम सामने आ रहा है।
हुड्डा ने तंज कसते हुए कहा कि अगर हर खेल और हर उद्योग गुजरात जाता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हरियाणा का मशहूर घेवर भी गुजरात का ‘अडानी घेवर’ कहलाएगा। दीपेंद्र ने दावा किया कि 3500 करोड़ रुपये के खेलो इंडिया बजट में गुजरात को 600 करोड़, जबकि हरियाणा को केवल 80 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार बड़ी संख्या में पदक जीतने वाले प्रदेश को इतना कम बजट क्यों दिया जा रहा है।
भिवानी में बॉक्सिंग, पानीपत और करनाल में एथलेटिक्स व भाला फेंक, रोहतक-सोनीपत में कुश्ती, अंबाला-करनाल-पानीपत में शूटिंग, जींद-सोनीपत में कबड्डी तथा शाहबाद में महिला हॉकी और सिरसा में पुरुष हॉकी को केंद्र बनाकर खेल ढांचा विकसित किया जा सकता है। पत्रकार वार्ता में अंबाला सांसद वरुण चौधरी, राज्यसभा सांसद कर्मवीर बौद्ध, विधायक शकुंतला खटक, बलराम दांगी, इंदूराज नरवाल, जस्सी पेटवाड़, देवेंद्र हंस, विकास सहारण और बलवान दौलतपुरिया सहित कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
हरियाणा को मिले खेलों की मेजबानी
हुड्डा ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में कॉमनवेल्थ, एशियाई और ओलंपिक खेलों में भारतीय पदकों में हरियाणा के खिलाड़ियों का योगदान करीब 50 प्रतिशत रहा है। ऐसे प्रदेश को बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से दूर रखने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि खेलों की मेजबानी का मकसद केवल आयोजन कराना नहीं होना चाहिए। सरकार को ऐसी खेल नीति बनानी चाहिए जिससे भारत पदक तालिका में शीर्ष पर पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान प्रदेश में छह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, चार एसएआई सेंटर और 232 खेल स्टेडियम विकसित किए गए थे। हुड्डा के अनुसार कांग्रेस सरकार ने 750 खिलाड़ियों को डीएसपी, इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर सहित विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्तियां दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के दौरान खिलाड़ियों की नियुक्तियों, प्रमोशन और कैश अवार्ड की व्यवस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 12 साल में नए स्टेडियम बनाने की बजाय मौजूदा खेल ढांचे के रखरखाव तक की अनदेखी हुई।
खेलों से लेकर डिफेंस यूनिवर्सिटी तक गुजरात क्यों
हुड्डा ने खेलों के साथ डिफेंस यूनिवर्सिटी का मुद्दा भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में उनके प्रयासों से मंजूर कराई गई डिफेंस यूनिवर्सिटी के बारे में जब उन्होंने संसद में सवाल पूछा तो पता चला कि नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी भी अहमदाबाद चली गई। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने खेलों की तरह रक्षा क्षेत्र में भी देश को बड़ी संख्या में प्रतिभाएं दी हैं। ऐसे में लगातार बड़े संस्थानों और आयोजनों का गुजरात की ओर जाना केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक और रोजगार अवसरों से जुड़ा सवाल है।
हरियाणा के लिए न्याय की लड़ाई सड़क से संसद तक
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के उस कथित बयान पर भी हुड्डा ने निशाना साधा, जिसमें गुजरात में कॉमनवेल्थ गेम्स होने का स्वागत किए जाने की बात कही गई। उन्होंने सवाल किया कि यदि गुजरात के पास बेहतर खेल ढांचा है तो पिछले 12 वर्षों में हरियाणा के मौजूदा खेल ढांचे की हालत किसने खराब होने दी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए प्रदेश सरकार को पहल करनी चाहिए। मुख्यमंत्री केंद्र को चिट्ठी लिखें, हम सभी उस पर हस्ताक्षर करेंगे। हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के हितों की यह लड़ाई संसद से सड़क तक जारी रहेगी।

