Haryana Horticulture Policy: बागवानी का पूरा ढांचा बदलेगा, नई पॉलिसी के साथ आएगी कोल्ड चेन नीति
बागवानी को खेत से बाजार तक जोड़ने की तैयारी, विभाग का नाम बदलकर ‘बागवानी एवं विपणन विभाग’ करने का प्रस्ताव
हरियाणा सरकार अब बागवानी को केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय उत्पादन से लेकर वैल्यू एडिशन, भंडारण और मार्केटिंग तक पूरी व्यवस्था बदलने की तैयारी में है। इसके लिए नई बागवानी पॉलिसी जल्द लागू करने के साथ विभाग के पुनर्गठन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। विभाग का नया नाम ‘बागवानी एवं विपणन विभाग’ करने की योजना है, ताकि किसानों को खेत से बाजार तक बेहतर संस्थागत सहयोग मिल सके। इसके साथ ही अलग कोल्ड चेन नीति लागू करने और बागवानी फसलों का ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण पूरे साल खुला रखने का फैसला प्रस्तावित है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने यह जानकारी दी।
उत्पादन के बाद बाजार तक सरकार का फोकस
अभी तक बागवानी को मुख्य रूप से उत्पादन और खेती की तकनीक से जोड़कर देखा जाता रहा है। सरकार अब इसमें वैल्यू एडिशन, बेहतर भंडारण और मार्केटिंग को भी समान रूप से जोड़ने जा रही है। इसी उद्देश्य से विभाग के ढांचे में बदलाव प्रस्तावित है। ‘बागवानी एवं विपणन विभाग’ बनने के बाद फोकस केवल फसल उगाने तक नहीं, बल्कि किसान को उसके उत्पाद का बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और मूल्य संवर्धन के लिए संस्थागत सहयोग देने पर रहेगा।
जल्द आएगी नई बागवानी पॉलिसी
राज्य में बागवानी को व्यापक और आधुनिक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए नई ‘बागवानी पॉलिसी’ तैयार की जा रही है। सरकार का कहना है कि इसे जल्द लागू किया जाएगा। इस पॉलिसी के साथ स्मार्ट बागवानी तकनीकों का दायरा बढ़ाने की भी तैयारी है। चालू वर्ष में प्रदेश के सभी जिलों में संरक्षित खेती, एरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, ग्रीनहाउस और वर्टिकल फार्मिंग को तेजी से प्रोत्साहित किया जाएगा। इन आधुनिक तकनीकों को करीब 1,000 एकड़ क्षेत्र में ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
मशरूम किसानों के लिए 40 से 50% अनुदान
हरियाणा सफेद बटन मशरूम उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सरकार किसानों को मशरूम इकाइयां स्थापित करने के लिए 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। वहीं अनुसूचित जाति के किसानों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए चल रही योजनाओं के तहत विभिन्न बागवानी गतिविधियों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है।
पूरे साल होगा बागवानी फसलों का पंजीकरण
2026-27 में बागवानी किसानों के लिए एक और बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर बागवानी फसलों का पंजीकरण पूरे साल खुला रहेगा। इससे किसानों को निर्धारित सीमित अवधि में पंजीकरण कराने की बाध्यता से राहत मिलेगी और वे अपनी बागवानी फसल का विवरण आसानी से दर्ज करा सकेंगे।
फसल बचेगी तो कीमत भी बचेगी
सरकार अब उत्पादन बढ़ाने के साथ फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए समर्पित ‘कोल्ड चेन नीति’ लागू करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य बागवानी उत्पादों के बेहतर भंडारण, कीमतों में स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात को बढ़ावा देना है। यानी सरकार की नई रणनीति का फोकस केवल ज्यादा फल-सब्जियां या मशरूम पैदा करने पर नहीं, बल्कि उत्पाद को सुरक्षित रखने, उसकी कीमत बढ़ाने और उसे बड़े बाजार तक पहुंचाने पर भी रहेगा।
बागवानी को वैकल्पिक आय का मजबूत आधार बनाने की कोशिश
सरकार इन बदलावों के जरिए बागवानी को किसानों के लिए अधिक लाभकारी और आधुनिक क्षेत्र के रूप में विकसित करना चाहती है। नई नीति, विभागीय पुनर्गठन, स्मार्ट खेती, सालभर फसल पंजीकरण और कोल्ड चेन सभी को एक साथ देखा जाए तो सरकार बागवानी की पूरी वैल्यू-चेन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

