आंचल में अंगारे... हरि की भूमि हमें पुकारे

हरियाणा में जमीन की सेहत खराब : उत्तर की मिट्टी में जिंक-आयरन, दक्षिण में आर्गेनिक कार्बन की कमी

आंचल में अंगारे... हरि की भूमि हमें पुकारे

मशीनों के जरिये मिट्टी के सैंपलों की जांच करते अधिकारी। - हप्र

ललित शर्मा/हप्र

कैथल, 28 जून

जिस मां के आंचल में दूध होना चाहिए, वह आंचल आज ‘जहर’ उगल रहा है। ऐसे में उस हरि की भूमि के जीव और जंतुओं का क्या हश्र होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

असल में जैविक कार्बन की कमी के चलते हरियाणा की धरती की सेहत गिर रही है। जमीन की सेहत सुधरेगी तभी हम सभी स्वस्थ होंगे। जानकारों ने आगाह किया है कि हरियाणा के लोग जमीन को स्वस्थ रखें। जमीन के बीमार होने का खुलासा मिट्टी के अनेक सैंपलों की जांच रिपोर्ट के बाद हुआ। कृषि विभाग ने वर्ष 2017 से 2019 तक प्रदेश में अलग-अलग जगहों से 13 लाख 42 हजार सैंपल लिए। जांच में पता चला कि कहीं जिंक, कहीं आयरन, कॉपर, मैगनीज, बोरोन, सल्फर जैसे पोषक तत्वों की कमी है। जैविक कार्बन की कमी तो पूरे प्रदेश की मिट्टी में है।

विशेषज्ञों की मानें तो जमीन की सेहत खराब इसलिए हो रही है कि अधिकतर किसान खाद का असंतुलित प्रयोग कर रहे हैं। अत्यधिक फसल प्राप्त करने के लिए विशेषज्ञों की सलाह लिए बगैर अंधाधुंध खाद का प्रयोग किया जा रहा है। इससे जमीन को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं। देखा गया है कि अधिकतर किसान यूरिया, डीएपी जैसे खादों को छोड़कर जिंक, आयरन, सल्फर आदि का प्रयोग नहीं कर रहे हैं जिससे जमीन की सेहत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।

उत्तरी हरियाणा की जमीन में जिंक व ऑयरन की कमी है। यह कमी उन क्षेत्रों में भी ज्यादा पाई गई है जहां गेहूं व धान की फसल का चक्र है। इसी प्रकार दक्षिण हरियाणा की मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन की कमी है। दक्षिण हरियाणा की वह जमीन जहां पर सरसों की फसल होती है और जमीन रेतीली है, वहां भी सल्फर की ज्यादा जरूरत होती है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों की मिट्टी में अलग-अलग पोषक तत्वों की कमी है।

इसलिए बीमार हो रही धरती सैंपल जांच रिपोर्ट के बाद आंकड़ों के मुताबिक यमुनानगर, रेवाड़ी, फतेहाबाद, अंबाला की जमीन में पोटाश और रोहतक, कैथल, महेन्द्रगढ़, सोनीपत, सिरसा, भिवानी, हिसार की जमीन में जिंक की कमी पाई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक जमीन की सेहत तंदुरुस्त रखने के लिए हमें क्षारीय, अम्लीय, विद्युत चालकता, जैविक कार्बन, फासफोरस, पोटैशियम, सल्फर, जिंक, ऑयरन, कॉपर, मैगनीज, बोरोन, नाइट्रोजन आदि पोषक तत्वों का ध्यान रखना होता है। लेकिन इनकी ओर ध्यान न देने से धरती बीमार हो रही है।

''खाद के अंधाधुंध व असंतुलित प्रयोग से जमीन की सेहत खराब हो रही है। इससे पशुओं व मनुष्यों में भी बीमारी बढ़ रही है। जाहिर है बीमार मिट्टी से फसल भी वैसी ही होगी जिसका असर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसी फसल से हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। पशुओं में भी प्राकृतिक तौर से गर्भधारण न हो पाने की समस्याएं आ रही हैं। अच्छी उपज की होड़ ने भूजल को भी जहरीला बना दिया है। मिट्टी संवर्धन पर इस साल अप्रैल से जून तक 26 लाख सैंपल लिए गए हैं। जांच चल रही है।'' - कुलदीप शर्मा, सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी

‘हरियाणा सरकार नहीं छोड़ रही कोई कोर-कसर’

कृषि विभाग ने हर खेत, स्वस्थ खेत के नाम से स्कीम चलाई

है। हर किसान मृदा एवं जल स्वास्थ्य कार्ड बनवाए। स्वास्थ्य कार्ड में दर्शाए मानदंडों के अनुसार खादों का प्रयोग करें। हरी खाद के रूप में डैंचा, मूंग, उड़द आदि की खेतों में जरूर बिजाई करें और उनके फसल अवशेषों को बाद में जमीन में अवश्य मिला दें। सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी स्कीम चलाई है। किसान उसका फायदा उठाएं। प्रदेश में 47 स्थायी भूमि परीक्षण प्रयोगशालाएं व 48 लघु प्रयोगशालाएं हैं। किसान वहां मिट्टी की जांच करा सकते हैं।

- कर्मचंद, कृषि उप निदेशक

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