हरियाणा में मेडिकल बोर्ड के फैसले पर अपील की व्यवस्था स्पष्ट नहीं, मानवाधिकार आयोग चिंतित
2017 की अधिसूचना और 2018 के संशोधन में अपील, पुनर्विचार या पुनरीक्षण की व्यवस्था स्पष्ट नहीं
Haryana Human Rights Commission : चिकित्सा लापरवाही की शिकायत करने वाले व्यक्ति के लिए जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के फैसले के बाद आगे की राह स्पष्ट नहीं है। यदि बोर्ड का निष्कर्ष गलत लगे तो उसे चुनौती कहां दी जाए, मौजूदा व्यवस्था इसका स्पष्ट जवाब नहीं देती। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने इस कमी को रेखांकित करते हुए राज्य सरकार से जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के निष्कर्षों के खिलाफ स्वतंत्र और प्रभावी अपीलीय व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है।
जांच की व्यवस्था है, फैसले के खिलाफ अपील का स्पष्ट प्रावधान नहीं
आयोग के समक्ष महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा की ओर से पेश रिपोर्ट में 2017 की सरकारी अधिसूचना और 2018 में किए गए संशोधन का हवाला दिया गया। इनके तहत चिकित्सा लापरवाही की शिकायतों की जांच के लिए जिला स्तर पर मेडिकल बोर्ड गठित किए गए हैं। आयोग ने कहा कि शिकायत की जांच के लिए बोर्ड का गठन और उसके निष्कर्ष को चुनौती देने का अधिकार, दोनों अलग-अलग पहलू हैं।
रिपोर्ट में ऐसा कोई अपीलीय, पुनर्विचार या पुनरीक्षण तंत्र नहीं बताया गया, जिसके माध्यम से जिला बोर्ड के निष्कर्ष को किसी उच्चतर या स्वतंत्र प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी जा सके।
‘व्यथित व्यक्ति को यूं नहीं छोड़ा जा सकता’
शिकायत संख्या 514/17/2023 की सुनवाई के दौरान आयोग की पूर्ण पीठ ने कहा कि केवल जिला स्तर पर व्यवस्था होने के आधार पर किसी व्यथित व्यक्ति को उपचार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। जब चुनौती जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड की राय या निष्कर्ष को लेकर हो, तब स्पष्ट, स्वतंत्र और सुव्यवस्थित अपीलीय उपाय उपलब्ध होना जरूरी है।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पीठ ने चिकित्सा लापरवाही से जुड़े मामलों के लिए संहिताबद्ध कानूनी ढांचा तैयार करने की जरूरत भी दोहराई।
राज्य स्तर की अपील को समानांतर जांच नहीं माना
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की ओर से राज्य स्तरीय अपीलीय प्राधिकरण बनाए जाने पर समानांतर कार्यवाही की आशंका जताई गई थी। आयोग ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जिला बोर्ड के समक्ष मूल कार्यवाही और राज्य स्तर पर अपील, दोनों क्रमिक चरण होंगे। पहले जिला बोर्ड शिकायत की जांच करेगा और उसके निष्कर्ष से असंतुष्ट व्यक्ति ही अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दे सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
आयोग ने राज्य सरकार से मामले पर उचित स्तर पर पुनर्विचार कर जिला बोर्ड के निष्कर्षों के खिलाफ प्रभावी अपीलीय व्यवस्था उपलब्ध कराने की सिफारिश की है। साथ ही अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा आयुष विभाग और महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा को इस दिशा में उठाए गए कदमों की एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार, दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखना होगा। प्रगति रिपोर्ट कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग में दाखिल करनी होगी। अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।

