Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

1970 निजी स्कूलों पर लटकी कार्रवाई की तलवार, 17 फरवरी डेडलाइन

आरटीई पर सरकार ने दिखाई सख्ती

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
सांकेतिक फाइल फोटो।
Advertisement
शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) को लेकर हरियाणा में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिल रही है। इसके तहत गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश न देने और जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर समय से अपलोड न करने के आरोप में 1970 निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग ने शिकंजा कस दिया है।

सितंबर में मौलिक शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों पर 30 हजार से 70 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया था, लेकिन अधिकांश स्कूल संचालकों ने अब तक राशि जमा नहीं कराई। अब मौलिक शिक्षा निदेशालय, हरियाणा ने सख्त रुख अपनाते हुए 17 फरवरी तक अंतिम मोहलत दी है। सरकार की ओर से दो-टूक कहा गया है कि निर्धारित तिथि तक जुर्माना जमा नहीं हुआ तो संबंधित स्कूलों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

Advertisement

निदेशालय ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कर कार्रवाई सुनिश्चित करें, जिन्होंने आरटीई के तहत आरक्षित सीटों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की या पोर्टल पर अनिवार्य दस्तावेज अपलोड नहीं किए। जिन स्कूलों ने जुर्माना माफी के लिए आवेदन किया है, उन्हें भी फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही।

Advertisement

स्कूल प्रबंधन का पलटवार

निजी स्कूल संचालकों ने विभागीय कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कई मामलों में उन्हें समय रहते ईमेल, फोन या लिखित सूचना नहीं दी गई। यदि किसी तकनीकी या दस्तावेजी कमी के कारण पोर्टल पर अपलोडिंग में देरी हुई, तो सीधे पोर्टल बंद कर जुर्माना थोप देना अनुचित है। स्कूल प्रबंधकों का तर्क है कि यदि किसी कागजात में कमी हो तो पहले लिखित रूप से सूचित किया जाना चाहिए, ताकि वे निर्धारित समय में सुधार कर सकें। उन्होंने शिक्षा निदेशक से जुर्माना माफ करने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की है।

सरकार का रुख स्पष्ट, ढिलाई बर्दाश्त नहीं

सरकार का रुख स्पष्ट है कि आरटीई के तहत वंचित बच्चों के प्रवेश में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। अब सबकी नजर 17 फरवरी की डेडलाइन पर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्कूल जुर्माना भरेंगे या मान्यता रद्द होने का जोखिम उठाएंगे।

Advertisement
×