Suicide Cases : एनआईटी कुरुक्षेत्र में आत्महत्या के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, निदेशक, डीसी और एसपी से जवाब तलब
कड़ा संज्ञान: एक सप्ताह में मांगी विस्तृत रिपोर्ट, 19 मई को होगी अगली सुनवाई
Suicide Cases : नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) कुरुक्षेत्र में पिछले कुछ महीनों के भीतर हुई छात्रों की आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों की घटनाओं को हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इन घटनाओं पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए एक विस्तृत जांच शुरू कर दी है। आयोग ने संस्थान की जवाबदेही, छात्रों की मानसिक सेहत और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
लगातार हो रही घटनाओं से आयोग चिंतित आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने कहा कि संस्थान में 16 फरवरी से 16 अप्रैल के बीच चार छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। वहीं, 17 अप्रैल को एक छात्रा ने हॉस्टल की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान देने की कोशिश की, जिसे समय रहते बचा लिया गया। आयोग ने टिप्पणी की कि प्रोफेसरों का तबादला करने जैसे सीमित कदम पर्याप्त नहीं हैं। बार-बार हो रही ये घटनाएं दर्शाती हैं कि संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और संकट प्रबंधन प्रणाली पूरी तरह विफल साबित हुई है।
संस्थान की जवाबदेही और मानसिक स्वास्थ्य
आयोग ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों का शारीरिक और मानसिक कल्याण सुनिश्चित करना भी उनकी प्राथमिकता है। आयोग के अनुसार, ये घटनाएं संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले 'जीवन और गरिमा के अधिकार' का उल्लंघन प्रतीत होती हैं।
निदेशक से मांगे इन बिंदुओं पर जवाब: मानवाधिकार आयोग ने एनआईटी के निदेशक को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। इसमें प्रमुख रूप से पूछा गया है कि:
लगातार हो रही आत्महत्याओं के पीछे के असल कारण और परिस्थितियां क्या हैं?
संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग की क्या सुविधा है और वह कितनी प्रभावी है?
तनावग्रस्त या आर्थिक तंगी से जूझ रहे छात्रों की पहचान के लिए क्या तंत्र है?
मेंटॉर-मेंटी कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति क्या है?
हॉस्टल खाली कराने और संस्थान को बंद करने का क्या औचित्य था?
प्रशासन और पुलिस से भी मांगी रिपोर्ट
आयोग ने कुरुक्षेत्र के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को भी नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की है। डीसी से पूछा गया है कि जिला प्रशासन ने इन घटनाओं के बाद सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर क्या समन्वय किया है। वहीं, एसपी को अब तक हुई जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने और आत्महत्या के कारणों की स्पष्ट जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
19 मई को अगली सुनवाई आयोग के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट अगली सुनवाई (19 मई) से कम से कम एक सप्ताह पहले जमा करानी होगी। आयोग इस मामले में संस्थान की आंतरिक जांच और दोषी पाए जाने वाले कारकों पर भी कड़ी नजर रख रहा है।
