सरकारी स्कूलों में अब एसएलसी की अनिवार्यता नहीं

सरकारी स्कूलों में अब एसएलसी की अनिवार्यता नहीं

चंडीगढ़, 4 मई (ट्रिन्यू)

हरियाणा सरकार ने निजी स्कूलों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में भर्ती करने को लेकर कई नियमों में बदलाव कर दिया है। पहली मई से नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। सरकारी स्कूलों में दाखिले चल रहे हैं। पिछले साल हरियाणा में लॉकडाउन के दौरान करीब 2 लाख बच्चों ने निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों का रुख किया था। इस साल सत्र के दौरान राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को अधिक से अधिक दाखिलों का लक्ष्य दिया है।

दूसरी ओर, विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूले जाने का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों को निजी स्कूल संचालकों द्वारा स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट नहीं दिए जा रहे हैं। इस उठापटक के बीच प्रदेश सरकार ने एक बार फिर से सरकारी स्कूलों में आने वाले विद्यार्थियों के लिए एसएलसी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। अब विद्यार्थियों को शिक्षा का अधिकार के आधार पर दाखिले दिए जाएंगे।

इतना ही नहीं, निजी स्कूल संचालकों द्वारा विद्यार्थियों को स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं दिया जा रहा है। इसके आधार पर भी विद्यार्थियों का दाखिला नहीं रोका जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्कूलों में आने वाले विद्यार्थियों का अस्थाई एसआरएन जारी करें। इस बीच, विद्यार्थी जिस स्कूल से आया है उस स्कूल को एसआरएन जारी करने के लिए कहा जाएगा। 2 सप्ताह के भीतर अगर निजी स्कूल संचालक एसआरएन नहीं देंगे तो सरकारी स्कूल द्वारा जारी किए गए अस्थाई नंबर को ही स्थाई मानकर विद्यार्थी की पढ़ाई को शुरू करवा दिया जाएगा।

क्लास-वन व टू अफसरों के लिए रोस्टर लागू

कोरोना के मद्देनजर शिक्षा विभाग में दर्जा एक व दो के अधिकारियों के लिए रोस्टर लागू कर दिया है। रोस्टर मंगलवार से लागू किया गया। इससे पहले, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के दफ्तर आने पर रोस्टर लागू था। अब क्लास-वन व टू के अधिकारी भी रोस्टर के अनुसार ही दफ्तरों में आएंगे। यही नहीं, शिक्षा निदेशालय ने विभागीय कार्यों के संबंध में हरियाणा के दूसरे जिलों से आने वाले विभागीय कर्मचारियों तथा शिक्षकों के आवागमन पर भी रोक लगा दी है।

स्कूलों में विद्यार्थियों का दाखिला शुरू हो चुका है। पिछले साल भी बहुत से विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में आए थे। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए इस साल भी एसएलसी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का पंजीकरण लगातार जारी है।Rs

-कंवर पाल गुर्जर, शिक्षा मंत्री

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