Haryana जेलों में ‘साइलेंट इमरजेंसी’, सलाखों के पीछे बढ़ीं आत्महत्याएं!
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने घटनाओं पर लिया कड़ा संज्ञान, नोटिस जारी
हरियाणा की जेलों से सामने आए चौंकाने वाले आंकड़ों ने राज्य की जेल व्यवस्था और कैदियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया-2024’ रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य की जेलों में आत्महत्याएं, हिंसा और मानसिक तनाव से जुड़ी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन आंकड़ों को बेहद गंभीर मानते हुए हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है और सरकार व जेल प्रशासन से विस्तृत जवाब तलब किया है।
आयोग ने कहा है कि जेल केवल अपराधियों को बंद रखने की जगह नहीं, बल्कि राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा हैं, जहां हर बंदी को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन घटनाओं को ‘मानवाधिकार और मानसिक स्वास्थ्य का गंभीर संकट’ करार दिया है।
एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान हरियाणा की जेलों में 15 अप्राकृतिक मौतें दर्ज की गईं और सभी मामलों में मौत का कारण आत्महत्या बताया गया।
इससे भी अधिक चिंता की बात यह रही कि जेल परिसर के भीतर आग्नेयास्त्रों से जुड़ी हिंसक घटनाएं दर्ज होने वाला हरियाणा देश का अकेला राज्य बनकर सामने आया। आयोग का मानना है कि ये घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि जेलों में बढ़ते मानसिक दबाव, अकेलेपन, अवसाद, नशे की लत और असुरक्षित माहौल की ओर संकेत करती हैं। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि हिरासत में बंद व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता जरूर खोता है, लेकिन उसका जीवन और मानवीय गरिमा समाप्त नहीं होती। ऐसे में राज्य की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
13 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
अब आयोग ने गृह एवं जेल विभाग, स्वास्थ्य विभाग और महानिदेशक कारागार से जेलों में आत्महत्या रोकने के उपाय, मनोवैज्ञानिकों की उपलब्धता, कैदियों की वास्तविक संख्या, सीसीटीवी और निगरानी व्यवस्था, नशा और अवैध हथियारों पर रोक तथा पुनर्वास कार्यक्रमों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।
कैदियों को टूटने से बचाना भी सरकार की जिम्मेदारी
आयोग ने कहा कि जेल प्रशासन का काम केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि कैदियों को मानसिक आघात, सामाजिक अलगाव और आत्मघाती प्रवृत्तियों से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। आयोग ने हरियाणा कारागार नियम 2022 के नियम 299 और 300 का विशेष उल्लेख किया। नियम 299 के तहत आत्महत्या में इस्तेमाल हो सकने वाली वस्तुओं को कैदियों की पहुंच से दूर रखने का प्रावधान है, जबकि नियम 300 आत्मघाती प्रवृत्ति वाले कैदियों की विशेष निगरानी और मनोवैज्ञानिक सहायता सुनिश्चित करने की बात करता है। आयोग ने सवाल उठाया कि जब नियम पहले से लागू हैं तो ऐसी घटनाएं लगातार क्यों बढ़ रही हैं।
कुरुक्षेत्र जेल निरीक्षण का भी किया जिक्र
आयोग ने अपने पुराने निरीक्षणों का हवाला देते हुए बताया कि जिला जेल कुरुक्षेत्र समेत कई जेलों में महिला कैदियों ने शिकायत की थी कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परामर्शदाता महीने में केवल एक बार आते हैं। आयोग ने तब विशेषज्ञों की नियमित साप्ताहिक विजिट व विश्वविद्यालयों के मनोविज्ञान विद्यार्थियों को संवाद कार्यक्रमों में शामिल करने की सिफारिश की थी।
