मायना में एक 'स्कूल' होने के मायने

'अ' से आत्मनिर्भर 'ई' से ईंधन 'उ' से उपले

'अ' से आत्मनिर्भर 'ई' से ईंधन 'उ' से उपले

स्कूल की भोजन लिस्ट में खिचड़़ी, चावल,कढ़ी-पकौड़ा लिखा हो मगर लिस्ट के नीचे ‘परोसा’ है गोबर ही गोबर l -हप्र

हरीश भारद्वाज/हप्र

रोहतक, 16 अप्रैल

जिले के इस स्कूल का ब्लैक बोर्ड भले धूल और गोबर की जुगाली करने में मस्त हो, मगर इसकी इमारत पर लिखी इबारत बच्चों को पढ़ाए जाने वाले स्वर और व्यंजनों को कुछ इस कदर परिभाषित करती प्रतीत होती है कि मायना का गांव उपलों के ईंधन से पूर्णरूपेण आत्मनिर्भर हो चुका है।

वैसे तो स्कूल परिसर के यहां दिए गए चित्र इस विद्या मंदिर की दास्तां खुद ही बयान कर रहे हैं, लेकिन शिक्षा अधिकारियों के इस कदर उदासीन रवैये से मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा देश भर में सर्वप्रथम दिए गए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' संदेश को कितनी गहरी ठेस पहुंची होगी इसका अनुमान इस तथ्य से सहज ही लगाया जा सकता है कि मायना और आसपास के गांव की बच्चियों के लिए खालिस रूप में 10 वर्ष पूर्व बनाया गया यह स्कूल आज बच्चियों और महिलाओं द्वारा पाथे गए गोबर के उपलों से लदा-अटा पड़ा है।

इस समाचार के छपने की प्रतिक्रिया के रूप में अब अधिकारी भले कोई भी तर्क दें, मगर इमारत को खंडहर बनाने के लिए लावरिस छोड़े जाने और पशु मालिकों को इस पर गोबर से 'रजिस्ट्रियां' लिखे जाने का अधिकार किसने दिया- क्या इसका उत्तर है अधिकारियों के पास?

छात्राओं को अपने घर-द्वार पर शिक्षा मिल सके, इसके लिए लाखों रुपये की लागत से गांव मायना में इस प्राइमरी स्कूल का निर्माण किया गया था। लेकिन स्कूल में छात्राओं की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने के कारण यहां कक्षाएं बंद कर दी गईं।

यहां पढ़ने वाली छात्राओं को दूसरे स्कूल में भेज दिया गया। इसके बाद किसी ने इस स्कूल की सुध नहीं ली। स्कूल के लिए बना भवन जर्जर हालत में है। स्कूल पर असामाजिक तत्वों ने कब्जा किया हुआ है। चारदीवारी को तोड़कर लोग कूड़ा डालने से लेकर बिटोडा (गोबर के उपलों के भंडारण) रखने के लिए स्कूल के कमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। गांव स्थित दूसरे प्राइमरी स्कूल की इंचार्ज सुमित्रा व शिक्षिका सुनील ने बताया कि वर्ष 2015 में छात्राओं की संख्या कम होने के कारण गांव के पहरावर रोड स्थित स्कूल को यहां पर शिफ्ट कर दिया गया था। वहां स्कूल के बंद कमरों में डेस्क आदि का कबाड़ पड़ा हुआ है। पिछले दिनों कबाड़ बेचने की अनुमति ली गई थी, लेकिन विभाग की गलती के कारण यह भी सिरे नहीं चढ़ पाया।

गांव का एक हाई स्कूल गांव के विपरीत दिशा में रोहतक-झज्जर मार्ग के दूसरी ओर बना हुआ है। इस मार्ग पर हर वाहनों की काफी आवाजाही रहती है, जिससे ग्रामीण छठी और सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को वहां दाखिल कराने के बजाय दूसरे गांव में भेज रहे हैं, जबकि गांव में ढाई एकड़ में बना यह स्कूल जर्जर होता जा रहा है। निवर्तमान सरपंच मोनिका एवं उनके पति दिनेश पंघाल ने बताया कि पंचायत कई बार उच्चाधिकारियों को लिखित में अपील कर चुकी है। इसके बावजूद विभाग अधिकारी इस बारे में कोई कदम नहीं उठा रहे। उन्होंने बताया कि पंचायत में ढाई एकड़ जमीन देकर पहरावर रोड पर लड़कियों के प्राइमरी स्कूल के लिए 4 कमरे बनवाए थे। यह प्राइमरी स्कूल 2012 में शुरू हुआ था और 2015 में छात्राओं की संख्या कम होने के कारण उसे गांव के भीतर बने दूसरे स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस समय भी ग्रामीणों ने सड़क के दूसरी तरफ बने सेकेंडरी स्कूल को इस स्कूल में शिफ्ट करने व यहां कुछ और नये कमरे बनवाने की बात कही थी, लेकिन विभाग अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। दिनेश ने बताया कि पिछले दिनों हाई स्कूल के 3 कमरों की सेंक्शन आई थी, उस समय भी उन्होंने इस स्कूल में 3 कमरे और बनाकर यहीं पर हाई स्कूल शिफ्ट करने का प्रस्ताव अधिकारियों को दिया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बरसात में बढ़ जाती है परेशानी

शिक्षिका सुमित्रा ने बताया कि यहां प्राइमरी स्कूल के 2 कमरों की छत बरसात में टपकती है। पहले मरम्मत करवा चुके हैं, अब फिर मरम्मत के लिए सेंक्शन मांगी है। जबकि पहरावर रोड वाले स्कूल में 4 कमरे हैं। इसी स्कूल प्रांगण में चलने वाले सीनियर सेकेंडरी स्कूल के इंचार्ज का काम संभाल रहे पीटीआई अमित कुमार ने बताया कि इस स्कूल का ग्राउंड का लेवल काफी नीचे होने के कारण बरसात में काफी परेशानी होती थी। ग्राउंड में कई बार सांप या जहरीले जानवर निकल आते थे। लेिकन शिक्षकों ने खुद पैसे इकट्ठे करके यहां मिट्टी डलवाई।

सबने झाड़ लिया जिम्मेदारी से पल्ला

शिक्षा विभाग का काम : पंचायत सेक्रेटरी नरेश ने बताया कि स्कूल का रख-रखाव करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होती है। स्कूल में गोबर डालने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह काम आस-पड़ोस के लोगों का हो सकता है। शिक्षा विभाग जब कहेगा तब उन्हें उठाकर साफ करवा देंगे।

अफसरों के संज्ञान में लाएंगे : ब्लॉक शिक्षा अधिकारी विजेंद्र हुड्डा ने कहा कि उनके पास एडिशनल चार्ज है, जिसके चलते अभी स्कूल का दौरा नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल का दौरा कर उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।

मामले की जानकारी नहीं : रोहतक की जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुनीता पवार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। स्कूल के हेड को उन्हें इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि जल्द ही स्कूल का दौरा कर इस बारे में जो भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारी लापरवाह या व्यस्त : इसे जिला शिक्षा अधिकारी विजयलक्ष्मी की लापरवाही कही जाए या उनकी व्यस्तता! पिछले 2 दिन से जिला शिक्षा अधिकारी को मोबाइल पर मैसेज देकर व फोन करके लगातार संपर्क साधने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

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