सफीदों : अवैध पटाखा फैक्टरी में आग, 4 महिलाओं की मौत
17 घायल, बाहर से बंद था गेट, लोगों ने दीवार तोड़कर मजदूरों को बचाया, 5 आरोपियों पर केस
सफीदों के वार्ड-10 की भाट कॉलोनी में अवैध रूप से कई वर्षों से चलाई जा रही बम-पटाखे व रंग की फैक्टरी में शनिवार को आग लगने से चार महिलाओं की मौत हो गयी। हादसे में झुलसे 17 मजदूरों को पीजीआई रोहतक, खानपुर, नागरिक अस्पताल जींद और पानीपत के गैलेक्सी अस्पताल में दाखिल कराया गया है।
हादसा करीब 11 बजे हुआ। आग में फंसी महिलाओं की चीखें सुनकर आसपास के लोग बचाव को भागे। इनमें कई लोगों का कहना है कि फैक्टरी का एकमात्र गेट बाहर से बंद था। न कोई मालिक मौके पर था और न ही बचाव का कोई उपाय। लोगों ने फैक्टरी के लंबे गुफानुमा भवन की दीवार तोड़कर झुलसी महिलाओं को बाहर निकाला।
बचाव में शामिल लोगों में आदर्श काॅलोनी के विनोद ने बताया कि एंबुलेंस मौके पर न पहुंचने के कारण लोगों ने निजी वाहनों में घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
हादसे में मारी गई महिलाओं की पहचान स्थानीय डिग्गी मोहल्ला की पूजा, सिंहपुरा गांव की पिंकी, आदर्श कॉलोनी की उषा और वार्ड 9 की गुड्डी के रूप में हुई है। श्रम विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर राजेश चौहान ने बताया कि यह फैक्टरी अवैध है और हादसे के बाद ही उनके विभाग की जानकारी में आई है। उन्होंने कहा कि मामले की गहन जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत में आरोप, जबरन करवा रहे थे काम
मामले के तार एक पटाखा किंग व उसके कारिंदे राशन डिपो होल्डर से जुड़े हैं, जिन्हें आरोपी बनाया गया है। थाना प्रभारी पूर्ण दास ने बताया कि हादसे का शिकार हुईं गुड्डी के बेटे विजय की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है। इसमें सफीदों के राकेश, देवेंद्र, सत्यनारायण और रामकरण को नामजद किया गया है, जबकि एक अन्य अज्ञात को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस को दी शिकायत में विजय ने कहा कि विस्फोटकों के खतरे के कारण उसकी मां ने काम छोड़ना चाहा, लेकिन मालिक पिछली मजदूरी का भुगतान रोककर उसे काम करने के लिए मजबूर करते रहे।
सरकारी डॉक्टरों ने निभाया ‘धर्म’
सफीदों में शनिवार को सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर थे। पीड़ितों को जब सिविल अस्पताल लाया गया, तब केवल आपातकालीन ड्यूटी पर प्रभारी डाॅक्टर सुनील पांचाल और डाॅक्टर प्रतीक थे। झुलसे मजदूरों की हालत देखकर डॉक्टर सुनील ने अस्पताल के पांचों अन्य डॉक्टरों को बुलाया, जो तत्काल पहुंचे और सेवा में जुट गए। होम्योपैथी डॉक्टर संदीप बिश्नोई ने भी मरीज संभाले।

