तावडू में जमीनों के बढ़ते दाम के साथ कब्जे के विवाद भी बढ़े, पुलिस पर कार्रवाई न करने के आरोप
गुरुग्राम सीमा से सटे गांवों में जमीन के रेट 4 से 15 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंचे; सुरजीवन रिजॉर्ट समेत कई मामलों में जबरन कब्जे के आरोप
नूंह जिले के तावडू उपमंडल में जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं और इसी के साथ जमीनों पर जबरन कब्जे और विवादों के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से मोहम्मदपुर अहीर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव गुरुग्राम सीमा के साथ लगते हैं, जहां आईटीसी ग्रैंड भारत, लेमन ट्री, कंट्री क्लब, सुरजीवन ,संडे रिजॉर्ट जैसे बड़े आलीशान फार्म हाउस और रिजॉर्ट हैं। इस कारण यहां जमीनों का रेट 4 करोड़ से लेकर 15 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गया है और जमीन माफिया सक्रिय हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक पहला बड़ा मामला सुरजीवन रिजॉर्ट से जुड़ा विवाद है, जो काफी सुर्खियों में रहा। यहां जमीन के एक हिस्से पर मामला कोर्ट में लंबित होने के बावजूद कुछ भू माफियाओं ने जबरन कब्जा कर लिया। पीड़ित पक्ष पुलिस से गुहार लगाता रहा लेकिन पुलिस चुप्पी साधे रही। यह मामला अभी भी शिकायत और कोर्ट में उलझा हुआ है। दूसरा मामला गांव बिस्सर अकबरपुर का है, जहां एक बेशकीमती जमीन पर जबरन कब्जे का मामला सामने आया था।
स्थानीय पुलिस की लापरवाही के चलते मामला दबा रहा, आरोप है कि भू-माफिया ने पुलिस के दलालों से मिलकर लेनदेन किया। बाद में तावडू डीएसपी के हस्तक्षेप के बाद मुकदमा तो दर्ज हो गया, लेकिन अब जांच के नाम पर अटका हुआ है। तीसरा मामला थाना क्षेत्र के गांव बेरी से जुड़ा है, जहां अवैध फार्म हाउस निर्माण और रास्ता रोककर कब्जे का आरोप है।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक कथित सरकारी अधिकारी ने अपनी पत्नी और बेटी के नाम पर जमीन खरीद कर वहां अवैध निर्माण करा रखा है और उसके साथ कुछ स्थानीय दलाल भी सक्रिय हैं। रात के अंधेरे में अवैध खनन के पत्थर लाए जाते हैं और फर्जी बिलों की शिकायत भी पुलिस को दी गई, लेकिन करीब एक दर्जन शिकायतों के बाद भी पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मामला अब कोर्ट में पहुंच गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मोहम्मदपुर अहीर के साथ लगते बेरी, बिस्सर अकबरपुर, सराय,कोटा आदि गांवों में जमीनों के बढ़ते दाम के कारण कब्जे के विवाद बढ़ रहे हैं। शिकायत देने के बाद भी पुलिस अपने हित साधते हुए चुप्पी साधे रहती है। कई बार इस खेल में बड़े अधिकारियों की भूमिका की भी चर्चा सामने आती है, जिससे यह क्षेत्र में एक बड़े विवाद का कारण बन सकता है।

