राइट-टू-सर्विस कमीशन ने HSVP को दी चेतावनी, ई-नीलामी से पहले प्लॉट पूरी तरह तैयार हों, उसके बाद ही बोली
Haryana News: सेक्टर 77 फरीदाबाद मामले में लगी अथॉरिटी को फटकार
Haryana News: हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने एचएसवीपी (हरियाणा शाहरी विकास प्राधिकरण) की ई-नीलामी प्रक्रिया पर सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट कहा है कि किसी भी प्लॉट को ऑनलाइन नीलामी में डालने से पहले सभी विकास कार्य 100 प्रतिशत पूरे होने चाहिए। सेक्टर-77 फरीदाबाद में हुए एक ई-नीलामी विवाद की समीक्षा करते हुए आयोग ने पाया कि एचएसवीपी ने अधूरे कार्यों के बावजूद प्लॉट को ‘क्लियर’ घोषित कर नीलामी में शामिल कर दिया, जिससे आवंटी को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ी।
आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि आम लोग सरकारी नीलामी पर पूर्ण विश्वास करते हैं और उसी भरोसे महंगी बोलियां लगाते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज जैसे मूलभूत ढांचे वहां विकसित होने चाहिएं। कब्जा देने से जुड़े सभी तकनीकी कार्य भी नीलामी से पहले पूरी तरह तैयार हों। प्रवक्ता के अनुसार, अधूरे कार्यों के कारण आवंटी को ना सिर्फ निर्माण में रुकावट आती है बल्कि मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की हानि होती है।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि आवंटन पत्र में तय शर्तों के विपरीत समय पर कब्जा नहीं दिया गया और देय ब्याज का भुगतान भी देरी से किया गया। आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही विभाग ने देय ब्याज देने की प्रक्रिया शुरू की। राइट टू सर्विस कमीशन ने अब एस्टेट ऑफिसर को आदेश दिए हैं कि आवंटी को देरी का पूरा ब्याज तुरंत दिया जाए। कब्जे की तिथि में सुधार किया जाए। जो अतिरिक्त एक्सटेंशन फीस वसूली गई थी, उसे नियमों के अनुसार वापस किया जाए। विभाग को यह भी कहा गया है कि 5 फरवरी तक पूरी अनुपालना रिपोर्ट जमा करे।
अधिग्रहण में थी भूमि, दिखा दिया क्लीयर
आयोग की जांच में एक बड़ा तथ्य सामने आया कि जिस प्लॉट को ई-नीलामी में ‘क्लीयर’ दिखाया गया था, उसकी सामने वाली जमीन अभी अधिग्रहण प्रक्रिया में ही थी। यह खुलासा एचएसवीपी की आधारभूत फील्ड रिपोर्टिंग और प्रशासनिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। आयोग ने इस मामले को हरियाणा के मुख्य सचिव तक भेजते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए विभागीय सुधार किए जाएं।
आवंटी को 5,000 मुआवजा, अधिकारियों से होगी रिकवरी
आयोग ने प्रभावित आवंटी मनोज वशिष्ठ को राइट-टू-सर्विस एक्ट, 2014 के तहत 5,000 मुआवज़ा देने के आदेश दिए हैं, जो एचएसवीपी को 15 दिनों में भुगतान करना होगा। साथ ही विभाग को यह अधिकार दिया गया है कि नियमों के अनुसार यह राशि जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली जा सकती है। कमीशन ने कहा कि एचएसवीपी भविष्य में यह सुनिश्चित करे कि जब तक प्लॉट पूरी तरह तैयार न हो, उसे ई-नीलामी में शामिल न किया जाए। सभी जानकारी पारदर्शी तरीके से पोर्टल पर उपलब्ध हो ताकि आवंटियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

