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पुलिस, फॉरेस्ट गार्ड और फायरमैन के पदों पर आरक्षण; अपना काम शुरू करने को 5 लाख तक ब्याजमुक्त ऋण

चार साल बाद लौटे अग्निवीरों के लिए हरियाणा में नौकरी से स्वरोजगार तक का रास्ता

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Haryana Agniveer : चार साल की सेवा पूरी कर वापस लौट रहे अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए हरियाणा ने सरकारी नौकरी से लेकर स्वरोजगार तक का रास्ता तैयार किया है। राज्य में पूर्व अग्निवीरों को पूर्व सैनिकों की तर्ज पर सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की नीति को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा अपना उद्यम शुरू करने के इच्छुक अग्निवीरों को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण देने का प्रावधान किया गया है।

पहला अग्निवीर बैच 31 जुलाई, 2026 को चार वर्ष की सेवा पूरी कर वापस लौटा है। इसी व्यापक पुनर्वास नीति के तहत सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग का बजट भी 58.93 प्रतिशत बढ़ाकर 178.14 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण मंत्री राव नरबीर सिंह ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अब तक 423 शहीद सैनिकों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। सरकार अब सैनिकों और उनके परिवारों के साथ-साथ अग्निवीरों तथा सेवानिवृत्त केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों के पुनर्वास पर भी फोकस कर रही है।

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अग्निवीरों के लिए नौकरी के साथ स्वरोजगार का विकल्प

हरियाणा सरकार के मुताबिक प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अग्निवीरों को पूर्व सैनिकों की तर्ज पर सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की नीति को मंजूरी दी है। पूर्व अग्निवीरों के लिए हरियाणा पुलिस में एसपीआईओ, फॉरेस्ट गार्ड और फायरमैन के पदों पर आरक्षण का प्रावधान किया गया है। सरकार ने पुनर्वास को केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं रखा है। अपना उद्यम शुरू करने वाले पूर्व अग्निवीरों को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही सशस्त्र पुलिस बलों और अग्निवीरों को दिए जाने वाले एकमुश्त वीरता पुरस्कार की राशि बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है।

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सैनिक कल्याण का बजट 59 फीसदी बढ़ेगा

सैनिकों और उनके परिवारों के लिए वित्तीय प्रावधान में भी बड़ा इजाफा प्रस्तावित है। सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग का बजट 58.93 प्रतिशत बढ़ाकर 178.14 करोड़ रुपये किया जाएगा। वर्ष 2016 में गठित इस विभाग के दायरे को अब पुनर्वास और आजीविका संवर्धन तक विस्तार देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वर्ष 2026-27 के बजट में हरियाणा सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण निगम स्थापित करने की घोषणा की थी। निगम के गठन की प्रक्रिया चल रही है। इसका उद्देश्य सैनिकों और अर्धसैनिक बलों से जुड़े लोगों के पुनर्वास तथा आजीविका के अवसरों को मजबूत करना है।

423 शहीद परिवारों को नौकरी

सैनिकों की सेवा और शहादत के बाद उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए सरकारी नौकरी की व्यवस्था को भी प्रमुखता दी जा रही है। मंत्री के अनुसार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 423 शहीद सैनिकों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। इसके साथ वीरता पुरस्कार की एकमुश्त राशि में बढ़ोतरी की गई है, जिससे सैनिकों और उनके परिवारों के लिए वित्तीय सहायता का दायरा बढ़ेगा।

रिटायर्ड सीएपीएफ कर्मियों को भी कल्याण दायरे में लाएगी सरकार

हरियाणा के सेवानिवृत्त केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कर्मियों का भी अब व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग की वेबसाइट पर इनका पंजीकरण कराया जाएगा। जिला सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण कार्यालयों के साथ पूर्व सैनिक संगठनों, सीएपीएफ संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन को पात्र सेवानिवृत्त कर्मियों को पंजीकरण के लिए प्रेरित करने तथा आवश्यक मार्गदर्शन देने को कहा जाएगा। इससे राज्य में रह रहे सेवानिवृत्त सीएपीएफ कर्मियों का एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार हो सकेगा और भविष्य की कल्याण योजनाओं को लक्षित करना आसान होगा।

सेना भर्ती के लिए युवाओं में लगातार उत्साह

मंत्री ने कहा कि हरियाणा के युवा थल सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल्स में भी बड़ी संख्या में सेवाएं दे रहे हैं। हाल ही में पंचकूला में राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय (आरआईएमसी), देहरादून के जनवरी 2027 सत्र के लिए भर्ती प्रक्रिया भी आयोजित की गई। वर्ष 1922 में स्थापित आरआईएमसी को सैन्य नेतृत्व की तैयारी करने वाले प्रमुख संस्थानों में माना जाता है। यहां से आगे चलकर विद्यार्थी एनडीए, ओटीए और आईएमए जैसे सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में जाते हैं।

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