आदर्श गांव : जटवाड़

प्रवेश द्वार से ही हो जाते हैं हकीकत के दीदार

प्रवेश द्वार से ही हो जाते हैं हकीकत के दीदार

अम्बाला के गांव जटवाड़ में जगह-जगह गंदगी का आलम है। -प्रदीप मैनी

कितने ‘आदर्श’ हैं माननीयों के गांव

राष्ट्रपति से लेकर अनेक निर्वाचित जनप्रतिनिधि बड़े चाव से गांव को गोद लेते हैं। ताम-झाम के साथ घोषणा भी करते हैं, लेकिन आदर्श ग्राम योजना के तहत जनप्रतिनिधि गांवों को गोद लेकर भूल से गए हैं। ‘माननीयों’ के गोद लिए गांव कहां तक और कितने 'आदर्श' हैं? उनकी हकीकत पर ग्राउंड रिपोर्ट शृंखला के तहत आज पेश है सांसद रतनलाल कटारिया के गोद लिए गांव जटवाड़ का हाल।

- संपादक

सुभाष चौहान/निस

अम्बाला, 20 मई

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद रतनलाल कटारिया का गोद लिया गांव जटवाड़ उन्हीं के दीदार को तरस गया है। किसान आंदोलन के बाद गुस्साए लोगों को शांत करते हुए सांसद ने नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र के इस गांव को गोद तो ले लिया था, लेकिन फिर पलट कर नहीं देखा। महीनों बाद ग्रामीणों को इस बात का पता चला कि गांव को गोद भी ले रखा है। ज्यादातर लोगों का आरोप है कि विकास कार्य नहीं हुए, हालांकि सांसद का दावा है कि सरकारी टीमें काम में लगी हैं और कुछ काम पाइप लाइन में हैं।

गांव में सफाई व्यवस्था चरमरा चुकी है। स्वास्थ्य सुविधाएं राम भरोसे हैं। करीब 6500 की आबादी वाला यह गांव अम्बाला जिले का एक चर्चित गांव है। अम्बाला छावनी से करीब 16 किलोमीटर दूर पड़ने वाले यहां के लोगों का मुख्य पेशा खेती-किसानी है। किसान आंदोलन में जटवाड़ गांव की भूमिका जिले में अग्रणी रही है। अम्बाला के सांसद रतनलाल कटारिया ने इस गांव को गोद लेकर विकास के बड़े-बड़े सपने दिखाए थे। गांव के युवा बलदीप, सोनू आदि का कहना है कि छतरी वाला चौक पर घूमने से ही पूरे गांव की व्यवस्था का अनुमान लगाया जा सकता है। महज दो सफाई कर्मी हैं। सफाई कैसी है, इसका अंदाजा गांव में घुसने वाले सभी रास्तों पर गन्दगी के ढेर से लगाया जा सकता है। पीने के पानी के लिए 15 साल पहले बनी टंकी को आज तक चालू नहीं किया गया। गांव में पूर्व की हुड्डा सरकार में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का निर्माण कराने की घोषणा हुई थी, लेकिन गांव का उचित प्रतिनिधित्व न होने की वजह से यह स्वास्थ्य केंद्र भी गांव धनाना में बना दिया गया। किसानों के लिए सहकारी समिति को भी पास के गांव पटवी में शिफ्ट कर दिया गया है। गांव में न खेल का मैदान है और न ही पार्क। अम्बाला के उपायुक्त विक्रम सिंह का कहना है कि गांव के विकास को लेकर प्रशासन काम कर रहा है। गांव में पेयजल संकट को दूर करते हुए सफाई व्यवस्था ठीक कराई जा रही है।

विकास का खाका है तैयार

सांसद रतन लाल कटारिया ने कहा कि सभी गांवों के विकास का खाका तैयार हो चुका है। अधिकतर गांवों में विकास कार्य शुरू हो गए हैं। जहां तक बात जटवाड़ की है यहां पर प्रशासन की दो टीमें गांव में सरकारी सुविधाओं के लिए भेजी हैं। नाले का निर्माण कराया गया है अन्य कुछ काम पाइप लाइन में हैं जिन्हें जल्द पूरा कराया जाएगा।

नेताओं को रोका गया था

गांव के सरपंच मामा राज कहते हैं कि किसान आंदोलन के दौरान नेताओं को गांव आने से रोक दिया था। इससे विकास रुका। वर्ष 2006 में अस्पताल के लिए ग्राम पंचायत ने जगह दे दी थी, लेकिन अस्पताल बना नहीं। उन्होंने बताया कि वह दो बार स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से भी मिल चुके हैं। गांव में पानी निकासी का संकट है। एक तरफ नाले का निर्माण हो गया है। 3 जोहड़ खुदवाए गए हैं।

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