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Pehowa: संगमेश्वर महादेव मंदिर अरूणाये में चली ऑनलाइन पूजा, मंदिर हुआ डिजिटल

Haryana News: श्रावण मास के पहले सोमवार को सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। श्रद्धालुओं ने पंचामृत दुग्ध दधी गन्ने के रस सहित अनेक प्रकार से भगवान शिव का जलाभिषेक किया तथा अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।...

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Haryana News: श्रावण मास के पहले सोमवार को सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। श्रद्धालुओं ने पंचामृत दुग्ध दधी गन्ने के रस सहित अनेक प्रकार से भगवान शिव का जलाभिषेक किया तथा अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। वहीं संगमेश्वर महादेव मंदिर अरूणाय का इतिहास का पूरी तरह से डिजिटल देखने को मिल रहा है।

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को घर बैठे श्रावण मास कीगतिविधियों की जानकारी देने के लिए अपनी वेबसाइट लांच की थी। अब पूजा की सभी प्रक्रिया इसी वेबसाइट के जरिए बुकिंग हो रही है। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी के मार्गदर्शन में मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी ने हाल ही में इस वेबसाइट को लांच किया था।

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महंत विश्वनाथ गिरी ने कहा कि देश विदेश से जुड़े श्रद्धालुओं की लंबे समय से मांग थी कि मंदिर से जुड़ी तमाम अपडेट डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाए। इसे देखते हुए डब्लयू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट संगमेश्वरधाम डॉट कॉम नाम से वेबसाइट लांच की गई है।

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मंदिर सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि वेबसाइट का लिंक क्लिक करते ही या क्यूआर कोड को स्केन करके मंदिर से जुड़ी तमाम अपडेट श्रद्धालुओं को प्राप्त होगी।वेबसाइट से बुक होगी पूजा।वेबसाइट पर लॉगिन करने से श्रद्धालुओं को मंदिर का इतिहास, श्रावण मास के दौरान लगने वाले भंडारों की जानकारी, मंदिर की दैनिक गतिविधियों की अपडेट मिलती रहेगी।

वेबसाइट के माध्यम से श्रद्धालु अखंड रुद्राभिषेक, 11000 बेलपत्र पूजन, सामान्य अभिषेक, पार्थिव शिवलिंग पूजन श्रावण मास व महाशिवरात्रि और मासिक त्रयोदशी के भंडारे आदि की बुकिंग भी करवा सकेंगे। इसके अलावा यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए लोकेशन भी इस वेबसाइट पर उपलब्ध होगी ।

पूजा बुक करने के लिए सबसे पहलेwww.sangameshwardham.com पर लॉगिन करें। उसके बाद ऊपर Menu पर क्लिक करें। मेनू के बाद Home पर क्लिक करें। Home पर क्लिक करते ही "श्रावण मास प्रतिदिन अभिषेक व पूजा के लिए यहां क्लिक करें" का विकल्प दिखेगा। इस पर क्लिक करते ही एक डिजिटल फॉर्म ओपन होगा। जिसमें श्रद्धालु को अपना नाम, मोबाइल नंबर, पता और किस पंडित से पूजा करवानी है उस पंडित का नाम चूज करने का ऑप्शन मिलेगा। यानी अपनी मनपसंद के पंडित से भी पूजा करवा सकते हैं।

विदेश में बैठा श्रद्धालु की पूजा पंडित द्वारा कर दी जाएगी तथा उसे व्हाट्सएप व मोबाइल पर दिखाया जाएगा। मोबाइल पर सारी अपडेट मिलती रहेंगी। प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि फिलहाल श्रावण मास के दौरान प्रतिदिन11000 बेलपत्र पूजन, अखंड रुद्राभिषेक, पार्थिव पूजन सहित कई धार्मिक गतिविधियां पूरा माह जारी रहेगी।

ये है मंदिर का इतिहास

संगमेश्वर मंदिर पिहोवा के निकट गांव अरूणाय में स्थित है। मंदिर पुस्तिका के मुताबिक यहां भगवान शिव स्वंय लिंग रूप में प्रकट हुए थे, जो स्वंय भू शिवलिंग के रूप में मुख्य मंदिर में विराजमान हैं। यहां महात्मा गणेश गिरि अपने शिष्यों सहित रहते थे। एक दिन वह झाडिय़ों की तरफ घूम रहे थे। वहां उन्हें घास के बीच एक दीमक का ढेर दिखाई दिया। जब उन्होंने अपने चिमटे से इस ढ़ेर को कुरेद कर देखा तो उनकी चिमटा किसी ठोस चीज से टकराया। जब उन्होंने दीमक को हटा कर देखा तो उन्हें यहां बड़ा सुंदर और तेजस्वी शिवलिंग दिखाई दिया।

उन्होंने सोचा कि क्यों न इस शिवलिंग को यहां से उखाड़कर किसी साफ स्थान पर स्थापित कर दिया जाए। उन्हें खुदाई करते करते सांय हो गई। लेकिन शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिला। थककर वे रात को सो गए। रात को उनके स्वप्न में भगवान शिव आए और उन्हें प्रेरणा दी कि वे इस शिवलिंग को यहां से हटने का प्रयास न करें। बल्कि इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करें। सुबह जब वे उसी स्थान पर पहुंचे तो देखा कि एक बड़ा काला सर्प शिवलिंग से लिपटा हुआ है। तब उन्होंने भगवान शिव से क्षमा मांगी और यहां मंदिर बनवाने का संकल्प लिया।

1942 से कुछ समय पूर्व यहां के तत्कालीन सचिव महंत गिरधर नारायाण गिरि ने यहां की दशा सुधारने का बीड़ा उठाया। भगवान शिव की कृपा से तत्कालीन सचिव की मांग पर संस्था ने यहां मंदिर बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। 1946 ई. में यहां महंत गिरधर नारायण पुरी व बाबा शरण पुरी के प्रयास से यहां मंदिर का निर्माण हुआ।

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