Video: तिरंगे की शान में पलवल ने रचा इतिहास, दो विश्व रिकॉर्ड की ओर बढ़े कदम
खेल मंत्री गौरव गौतम के आह्वान पर तिरंगा लेकर सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, ‘लॉन्गेस्ट मास मार्च विद फ्लैग’ और ‘मोस्ट पीपल होल्डिंग नेशनल फ्लैग’ का प्रयास
स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले पलवल की सड़कों पर तिरंगे का ऐसा सैलाब उमड़ा कि शहर देशभक्ति के रंग में रंग गया। खेल मंत्री गौरव गौतम के नेतृत्व और आह्वान पर हजारों लोग हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर मास मार्च में शामिल हुए। इस आयोजन के जरिए एक साथ दो विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया गया।
पहला प्रयास राष्ट्रीय ध्वज के साथ सबसे लंबे मास मार्च और दूसरा एक साथ सबसे अधिक लोगों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज थामने की श्रेणी में किया गया। आयोजन के बाद गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दोनों श्रेणियों में प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी कर दिए। हालांकि अंतिम रिकॉर्ड की आधिकारिक मान्यता निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
एक तिरंगा, हजारों हाथ और एक संदेश
बृहस्पतिवार की सुबह से ही पलवल में माहौल बदला हुआ नजर आया। अलग-अलग स्थानों से लोग तिरंगा लेकर आयोजन स्थल की ओर पहुंचे। जैसे-जैसे प्रतिभागियों की संख्या बढ़ती गई, शहर की सड़कों पर तिरंगे ही तिरंगे नजर आने लगे। बच्चों, युवाओं और आम नागरिकों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामकर मार्च में हिस्सा लिया। यह सिर्फ एक मार्च नहीं था। हजारों लोगों का एक साथ तिरंगा लेकर चलना राष्ट्रीय एकता और देश के प्रति सम्मान का सामूहिक प्रदर्शन बन गया। स्वतंत्रता दिवस से पहले आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे पलवल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
दो रिकॉर्ड, एक ही आयोजन
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि एक ही कार्यक्रम में दो अलग-अलग विश्व रिकॉर्ड की दावेदारी की गई। ‘लॉन्गेस्ट मास मार्च विद फ्लैग’ श्रेणी में राष्ट्रीय ध्वज के साथ सबसे लंबे मास मार्च का प्रयास किया गया, जबकि ‘मोस्ट पीपल होल्डिंग नेशनल फ्लैग’ श्रेणी में एक साथ सबसे अधिक लोगों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज थामने का रिकॉर्ड बनाने की कोशिश हुई। रिकॉर्ड के लिए आवश्यक गतिविधियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही और पूरे मार्च के दौरान प्रतिभागी हाथों में तिरंगा थामे रहे।
गोल्डन बुक की मुहर, लेकिन अंतिम फैसला बाकी
आयोजन के बाद गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से दोनों श्रेणियों में प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किए गए। यह आयोजन के लिए महत्वपूर्ण प्रारंभिक मान्यता है, लेकिन इसे अंतिम विश्व रिकॉर्ड की पुष्टि नहीं माना जा सकता। रिकॉर्ड की अंतिम मान्यता के लिए आयोजन से संबंधित प्रमाणों और निर्धारित मानकों का सत्यापन किया जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों श्रेणियों में पलवल के नाम आधिकारिक विश्व रिकॉर्ड दर्ज होते हैं या नहीं।
रिकॉर्ड से बड़ा राष्ट्रभक्ति का संदेश : गौतम
खेल मंत्री गौरव गौतम ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य केवल विश्व रिकॉर्ड बनाना नहीं था। इसके पीछे युवाओं और आम नागरिकों में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना और तिरंगे के प्रति सम्मान का भाव पैदा करना भी था। उन्होंने कहा कि जब हजारों लोग एक साथ हाथों में तिरंगा लेकर निकलते हैं तो यह दृश्य अपने आप में देश की एकता और अखंडता का संदेश देता है। उनका कहना था कि पलवल से निकली यह पहल युवाओं को राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और गौरव की भावना से जोड़ने का माध्यम बनेगी।
शहर बना तिरंगामय
मास मार्च में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के कारण पलवल की सड़कों पर घंटों तक तिरंगे का रंग दिखाई दिया। स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संगठनों, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। देशभक्ति के नारों और हाथों में लहराते तिरंगों के बीच निकले मार्च ने शहर में अलग माहौल पैदा कर दिया। स्वतंत्रता दिवस से पहले आयोजित इस कार्यक्रम ने पलवल को एक बड़े सामूहिक राष्ट्रभक्ति आयोजन के केंद्र के रूप में सामने ला दिया।
अब अंतिम प्रमाणन का इंतजार
दोनों श्रेणियों में प्रोविजनल सर्टिफिकेट मिलने के बाद अब अंतिम सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। यदि निर्धारित मानकों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में सभी दावे सही पाए जाते हैं तो पलवल के इस आयोजन को दो विश्व रिकॉर्ड की अंतिम मान्यता मिल सकती है। फिलहाल इतना तय है कि 13 अगस्त को पलवल की सड़कों पर हजारों हाथों में लहराया तिरंगा सिर्फ एक आयोजन का हिस्सा नहीं रहा। उसने देशभक्ति, सामूहिक भागीदारी और राष्ट्रीय एकता का बड़ा संदेश दिया और पलवल को दो संभावित विश्व रिकॉर्ड की दहलीज पर ला खड़ा किया।

