Padma Awards : ‘गुमनाम नायक’ खोजने की मुहिम, हरियाणा ने मांगे पद्म पुरस्कारों के लिए नाम, जमीनी स्तर के असली टैलेंट को मिले पहचान
सरकार का फोकस, 31 जुलाई तक ऑनलाइन भेजी जा सकेंगी सिफारिशें, ‘एक्सीलेंस प्लस’ और जनसेवा होगी चयन की कसौटी
Padma Awards : देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों के लिए हरियाणा सरकार ने इस बार एक खास अपील के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू की है। लक्ष्य सिर्फ बड़े नामों तक सीमित नहीं, बल्कि उन ‘गुमनाम नायकों’ को सामने लाना है, जो बिना किसी प्रचार के समाज में असाधारण योगदान दे रहे हैं। राज्य सरकार ने पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री के लिए सिफारिशें आमंत्रित करते हुए स्पष्ट किया है कि योग्य व्यक्तियों की पहचान व्यापक स्तर पर की जाए।
इन पुरस्कारों की घोषणा 26 जनवरी, 2027 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाएगी। पद्म पुरस्कार आमतौर पर जीवित व्यक्तियों को दिए जाते हैं, हालांकि विशेष परिस्थितियों में मरणोपरांत सम्मान भी संभव है। सरकारी कर्मचारी (चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को छोड़कर) इसके लिए पात्र नहीं होते। वहीं, पहले से सम्मानित व्यक्ति के मामले में कम से कम पांच साल का अंतर जरूरी है, हालांकि विशेष मामलों में इसमें छूट दी जा सकती है।
ऑनलाइन प्रक्रिया, सख्त समय-सीमा
नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। आवेदन 15 मार्च से शुरू हो चुके हैं और अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है। राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, मंडल आयुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 10 जून तक अपने स्तर पर सिफारिशें भेजें। केंद्र सरकार केवल निर्धारित पोर्टल के माध्यम से प्राप्त नामांकन ही स्वीकार करेगी, इसलिए सही प्रारूप और पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा।
इसलिए खास है इस बार की पहल
हर साल बड़ी संख्या में नामांकन आने के बावजूद कई योग्य और प्रतिभाशाली लोग सूची से बाहर रह जाते हैं। खासतौर पर वे लोग, जो प्रचार से दूर रहते हैं या जिनका काम सीमित दायरे में चर्चित होता है। सरकार ने इस बार विशेष तौर पर ऐसे लोगों की पहचान पर जोर दिया है, जो चुपचाप समाज में बदलाव ला रहे हैं।
हर क्षेत्र के लिए खुले दरवाजे
पद्म पुरस्कार किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, विज्ञान, सामाजिक कार्य, उद्योग और लोक सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोग इसके लिए पात्र हैं। इन पुरस्कारों की खास बात यह है कि इनमें जाति, वर्ग, पद या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता।
महिलाओं और वंचित वर्गों पर विशेष फोकस
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि नामांकन करते समय महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, दिव्यांगजन और समाज के कमजोर वर्गों से आने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों को प्राथमिकता से चिन्हित किया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के हर वर्ग से उत्कृष्ट प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
सर्च कमेटी से होगी छंटनी
नामांकन प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए विभागीय स्तर पर सर्च कमेटियों के गठन का सुझाव दिया गया है। ये कमेटियां संभावित नामों की पहचान करेंगी और उनके योगदान का मूल्यांकन कर अंतिम सिफारिश तैयार करेंगी। चयन के लिए ‘एक्सीलेंस प्लस’ यानी असाधारण उपलब्धि के साथ जनसेवा का तत्व होना जरूरी माना गया है।

