धान खरीद घोटाला संगठित लूट का नतीजा : राव नरेंद्र
राव नरेंद्र सिंह का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर घोटाला उजागर होना यह साबित करता है कि भाजपा शासनकाल में प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा चुकी है। उनके अनुसार, यह मामला किसी छोटी त्रुटि या लापरवाही का परिणाम नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षण में पनप रही सुनियोजित लूट का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और निगरानी तंत्र की विफलता ने भ्रष्टाचारियों को खुली छूट दे दी है।
यमुनानगर की राइस मिलों में सामने आए हजारों मीट्रिक टन धान के अंतर को राव ने गंभीर साजिश बताया। उनका कहना है कि इतनी बड़ी धोखाधड़ी बिना प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के संभव ही नहीं है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और उच्च स्तरीय जांच की मांग की, ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें। राव नरेंद्र सिंह ने पूछा कि जब घोटाला उजागर हो चुका है तो अब तक दोषियों पर त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कई अधिकारियों द्वारा अग्रिम जमानत लेना भी उनके अनुसार इस बात का संकेत है कि सरकार दोषियों को बचाने में अधिक रुचि रखती है, न कि सच सामने लाने में। उन्होंने कहा कि किसानों और सरकारी खजाने को हुए बड़े नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इस पर सरकार को तुरंत स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
राव ने मांग की कि घोटाले में शामिल राइस मिलों, अधिकारियों और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाए और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में हरियाणा लगातार घोटालों की चपेट में रहा है, और धान घोटाला उस शृंखला का ताज़ा एवं सबसे बड़ा उदाहरण है। जनता जवाब मांग रही है, और कांग्रेस इस मामले को हर मंच पर मजबूती से उठाती रहेगी।
