‘अग्निपथ’ से नरेन्द्र मोदी सरकार ने युवाओं के सपनों को कुचल दिया : दीपेंद्र हुड्डा

‘अग्निपथ’ से नरेन्द्र मोदी सरकार ने युवाओं के सपनों को कुचल दिया : दीपेंद्र हुड्डा

फाइल फोटो

जयपुर, 26 जून (एजेंसी)

सेना में ‘अग्निपथ' योजना को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस पार्टी के हरियाणा से राज्यसभा सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने रविवार को कहा सरकार ने नकलची बंदर का रूप ले लिया है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर प्रेसवार्ता में हुड्डा ने कहा, ‘इस सरकार ने नकलची बंदर का रूप ले लिया है, कभी अमेरिका से ला रहे हैं, कभी इस्राइल से ला रहे हैं। लेकिन हिन्दुस्तान में हिंदुस्तान के लोगों के अनुकूल जो नीतियां हैं, वही चलेंगी, वहां की बाहरी नीतियां नहीं चलेंगी।' उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा अग्निपथ योजना को लेकर इस्राइल का उदाहरण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सरकार जब तीन कृषि कानून लेकर आई थी, तब भी कहा था कि अमेरिका के अंदर इसी रूप में कारपोरेट सेक्टर कृषि क्षेत्र में है। हुड्डा ने कहा, ‘‘हमने कहा अमेरिका नहीं.. हिन्दुस्तान अलग है.. परिस्थितियां अलग है.. आप इस देश को समझो।'' उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हिन्दुस्तान की परिस्थितियां देखते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की प्रणाली और मंडी प्रणाली को विकसित करने का काम किया था। हुड्डा ने कहा कि पहले कह रहे थे कि कृषि कानूनों को अमेरिका से लेकर आये हैं, अब कह रहे हैं कि इस्राइल में ऐसा है। हुड्डा ने साफ किया कि इस्राइल छोटा मुल्क है, जहां बेरोजगारी नहीं है और शत प्रतिशत रोजगार है तथा वहां कोई स्वेच्छा से सेना में जाना ही नहीं चाहता।

उन्होंने पूछा कि कि जब सैनिक का भविष्य सुरक्षित नहीं है तो वह सीमाओं की रक्षा कैसे कर पाएगा। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने युवाओं के सपनों को कुचल दिया है। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी की मांग है कि अग्निपथ योजना को तुरंत केन्द्र सरकार वापस ले। हमारा मानना है कि यह योजना न तो देश और सेना के हित में है और ना ही राष्ट्र की सुरक्षा के हित में है। यह हमारे देश के नौजवानों के भविष्य के लिए नहीं है।' उन्होंने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री से कांग्रेस पार्टी आग्रह करती है कि वह अहंकार छोड़कर देश के नौजवानों और फौज के मन की बात को भी सुनें। उन्होंने कहा कि इस सरकार की यह कार्यशैली रही है कि बिना किसी की सलाह के योजना लेकर आते हैं और इसे लागू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि ‘अग्निपथ योजना' को लेकर न तो संसद को विश्वास में लिया गया, न रक्षा मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति में कोई चर्चा की गई, न ही इस योजना को लेकर व्यापक रूप से देश में कोई चर्चा हुई।

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