मंत्रियों का परफार्मेंस कार्ड तैयार, विभागों में बदलाव संभव : The Dainik Tribune

पहली को ही होगी कैबिनेट बैठक

मंत्रियों का परफार्मेंस कार्ड तैयार, विभागों में बदलाव संभव

मंत्रियों का परफार्मेंस कार्ड तैयार, विभागों में बदलाव संभव

दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू

चंडीगढ़, 24 नवंबर

हरियाणा सरकार के मंत्रियों में बड़े बदलाव का खाका तैयार हो गया है। दिसंबर के पहले सप्ताह में ही यह बदलाव संभव है। सीएमओ में इसकी तैयारियां चल रही हैं। कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। सीएम मनोहर लाल खट्टर के बृहस्पतिवार और शुक्रवार को चंडीगढ़ में ही रहने को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी दिल्ली गए हैं। बताते हैं कि वे एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए गए हैं।

सूत्रों का कहना है कि सरकार फिलहाल कैबिनेट में बदलाव करने के मूड में नहीं है। अलबत्ता मंत्रियों के विभागों में जरूर बदलाव संभव है। यह बदलाव इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि सरकार एक दर्जन के करीब विभागों को आपस में मर्ज करने जा रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। पहली दिसंबर को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक भी होनी है। विभागों के बदलाव के लिए राज्यपाल से औपचारिक मंजूरी ली जाएगी और फिर इसका नोटिफिकेशन जारी होगा।

प्रदेश में दो कैबिनेट मंत्री – देवेंद्र सिंह बबली और डॉ़ कमल गुप्ता लगभग एक साल पहले ही मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं। बाकी मंत्रियों का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में सभी मंत्रियों की परफार्मेंस का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार हो चुका है। आदमपुर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी भव्य बिश्नोई की जीत के बाद इस तरह के कयास थे कि कैबिनेट में बदलाव हो सकता है और भव्य की मंत्रिमंडल में एंट्री हो सकती है। सीएमओ से जुड़े सूत्रों की मानें तो फिलहाल लम्बी कवायद करने के मूड में सरकार नहीं है। ऐसे में भव्य बिश्नोई की एंट्री होने के भी आसार नहीं हैं। इसका दूसरा कारण यह भी है कि हिसार जिले से सरकार में पहले ही काफी प्रतिनिधित्व है। निकाय मंत्री डॉ़ कमल गुप्ता हिसार से हैं तो डिप्टी स्पीकर रणबीर सिंह गंगवा भी हिसार जिले का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। जजपा कोटे से राज्य मंत्री बने अनूप धानक भी इसी जिले से आते हैं। ऐसे में हिसार से अब और एडजस्टमेंट की गुंजाइश नहीं है।

हां, अगर सरकार को बहुत जरूरी लगता है तो इसके लिए किसी एक मंत्री को पद से हटाना होगा। बताते हैं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल उन मंत्रियों को वेट दे सकते हैं, जिनके विभागों की अभी तक की परफार्मेंस से वे खुश हैं। कुछ हेवीवेट मंत्रियों के विभागों पर तलवार भी चल सकती है। विवादों में रहने वाले विभागों को लेकर भी पूरी रणनीति तय हो गई है।

मंत्रियों के विभागों में हो रहे बदलाव के पीछे यह भी दलील दी जा रही है कि सरकार कई विभागों को आपस में मर्ज कर रही है। वर्तमान में इन विभागों के अलग-अलग मंत्री हैं। विभागों के मर्जर फैसला भी इसलिए लिया क्योंकि ये आपस में लिंक हैं और अलग-अलग मंत्री होने की वजह से फाइलें लटकती रहती हैं। मर्जर के बाद कई विभाग हेवीवेट हो जाएंगे और वे जिस भी मंत्री को मिलेंगे, उसके कोटे से दूसरे विभाग वापस लिए जा सकते हैं।

पावर से जुड़े विभाग होंगे एक जगह

पावर से जुड़े विभागों को भी इकट्ठा किया जाएगा। वर्तमान में बिजली विभाग अलग है और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा यानी अक्षय ऊर्जा विभाग अलग है। इनके प्रबंध निदेशक भी अलग-अलग हैं। बेशक, दोनों विभागों की कमान चौ. रणजीत सिंह के पास है, लेकिन अब सरकार इसका आपस में मर्जर करेगी। पशुपालन एवं डेयरी तथा मत्स्य पालन विभाग अलग-अलग हैं। आमतौर पर इन विभागों का मंत्री एक ही रहता है। सरकार मंत्रालय बढ़ाने के चक्कर में इन्हें बांट भी देती है। अब इन दोनों विभागों को मिलाकर एक किया जाएगा।

खेल विभाग से युवा मामले होगा अलग

खेल एवं युवा मामले विभाग से युवा मामले को अलग कर सिटीजन रिसोर्स डिपार्टमेंट के अंडर लाने की तैयारी है। यह नया विभाग युवाओं के रोजगार व अन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया है। खट्टर सरकार अभी तक राज्य में चार नये विभाग बना चुकी है। सिटीजन रिसोर्स डिपार्टमेंट का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत फैमिली आईडी यानी परिवार पहचान-पत्र का भी काम हो रहा है। मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना को भी इसके साथ लिंक किया गया है।

फायर को निकाय से अलग करने की तैयारी

फायर डिपार्टमेंट शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अंतर्गत आता है। इसे निकाय से अलग करके आपदा प्रबंधन में मर्ज किया जा सकता है। सप्लाई एंड डिस्पोजल डिपार्टमेंट में भी इसी तरह का बदलाव होगा। कृषि और बागवानी विभाग के निदेशालय व निदेशक अलग-अलग हैं। आमतौर पर ये दोनों विभाग एक ही मंत्री के पास रहते हैं। बहरहाल, कैबिनेट में बदलाव की खबरें राजनीतिक व प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का विषय बनी हुई हैं। यह देखना रोचक रहेगा कि किस मंत्री के विभागों पर कितनी कैंची चलेगी।

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