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मीटरिंग से खपत पर नजर, ट्रीटेड पानी का 100 फीसदी री-यूज लक्ष्य; हर घर नल के बाद अब पानी की बर्बादी पर सरकार का शिकंजा

235 पुराने ट्यूबवेल रिचार्ज वेल में बदलेंगे, डार्क जोन में भूजल संरक्षण; 655 एमएलडी ट्रीटेड पानी का हो रहा इस्तेमाल, मार्च 2031 तक पूरा लक्ष्य

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Haryana Water Management : हरियाणा में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने के बाद अब सरकार ने पानी बचाने और उसकी एक-एक बूंद का बेहतर इस्तेमाल करने पर फोकस कर दिया है। बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्रदेश में पानी की खपत की मीटरिंग, भूजल रिचार्ज, सीवरेज के ट्रीटेड पानी के पुन: उपयोग और गांवों में जलापूर्ति योजनाओं के संचालन में जनभागीदारी बढ़ाने की तैयारी है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ‘मीटरिंग-एज-ए-सर्विस’ मॉडल के तहत मीटर लगाए जाएंगे, जबकि मार्च 2031 तक ट्रीटेड पानी का 100 फीसदी पुन: उपयोग करने का लक्ष्य रखा गया है।

जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा ने नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय के दो दिवसीय विभागीय सम्मेलन में हरियाणा की जलापूर्ति, संरक्षण और सीवरेज व्यवस्था की जानकारी देते हुए यह बात कही। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और विभिन्न राज्यों के जल एवं पेयजल विभागों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

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गंगवा ने कहा कि जल शक्ति मंत्रालय का सम्मेलन राज्यों को पानी की उपलब्धता, संरक्षण, पेयजल योजनाओं के बेहतर प्रबंधन और भविष्य की जरूरतों पर एक-दूसरे के अनुभव साझा करने का अवसर देता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्यों को तैयार करने और जल बचत तकनीकों को बढ़ावा देने के विजन की सराहना की।

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उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने, पेयजल स्रोतों की सुरक्षा और गांवों की जलापूर्ति योजनाओं के प्रभावी प्रबंधन पर जोर देने की भी सराहना की। गंगवा ने कहा कि प्रदेश का लक्ष्य अब सिर्फ पर्याप्त और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पानी को बचाना, दोबारा इस्तेमाल करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल स्रोत सुरक्षित रखना है।

अब पानी की खपत भी होगी मीटर से मापी

सरकार का अगला बड़ा कदम पानी की खपत पर निगरानी से जुड़ा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मीटर लगाने की तैयारी की जा रही है। ‘मीटरिंग-एज-ए-सर्विस’ मॉडल से यह पता चल सकेगा कि किसी क्षेत्र में कितना पानी पहुंचाया जा रहा है, कितनी खपत हो रही है और सप्लाई के दौरान कितना पानी बर्बाद हो रहा है। पानी के प्रेशर की भी निगरानी की जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य लोगों को आवश्यकता के अनुरूप पानी इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना और अनावश्यक खपत पर अंकुश लगाना है।

655 एमएलडी पानी दोबारा इस्तेमाल

जल संरक्षण की रणनीति में ट्रीटेड सीवेज वाटर का पुन: उपयोग अहम हिस्सा है। प्रदेश में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित करीब 655 एमएलडी पानी अभी कृषि, बागवानी, उद्योग, निर्माण कार्य और थर्मल पावर प्लांटों में इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार इसे और विस्तार देने जा रही है। लक्ष्य है कि मार्च 2031 तक राज्य में ट्रीटेड पानी का 100 फीसदी पुन: उपयोग सुनिश्चित हो। इससे ताजे पानी के स्रोतों पर दबाव घटाने के साथ पानी को बेकार बहने से भी रोका जा सकेगा।

235 ट्यूबवेल बनेंगे भूजल रिचार्ज का जरिया

भूजल स्तर को बचाने के लिए डार्क जोन में रिचार्ज वेल स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार ने 31 रिचार्ज वेल मंजूर किए थे, जिनमें से 26 स्थापित हो चुके हैं और 12 ने काम करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा करीब 235 पुराने और अनुपयोगी ट्यूबवेलों को रिचार्ज वेल में बदलने की योजना है। बारिश के पानी को इन संरचनाओं के माध्यम से जमीन के भीतर पहुंचाया जाएगा। गंगवा ने कहा कि हर घर नल का लक्ष्य हासिल करने के बाद अब चुनौती इन जलापूर्ति व्यवस्थाओं को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने की है। इसके लिए जल संरक्षण और पानी के पुन: उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।

पानी की व्यवस्था में पंचायतों की भूमिका बढ़ेगी

जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव और संचालन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के लिए ओएंडएम पॉलिसी-2026 के तहत ग्राम पंचायतों और विलेज वाटर एंड सैनिटेशन कमेटियों को जिम्मेदारी दी जा रही है। पंचायतें जलापूर्ति के रोजमर्रा के संचालन में भूमिका निभाएंगी, जबकि जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा। अब तक 1486 ग्राम पंचायतें एमओयू कर चुकी हैं।

132 महाग्रामों में शहर जैसी पानी-सीवर व्यवस्था

सरकार बड़े गांवों में शहरी तर्ज पर जलापूर्ति और सीवरेज सुविधाएं विकसित कर रही है। महाग्राम योजना के तहत 10 हजार से अधिक आबादी वाले 132 गांवों को कवर किया गया है। इनमें 27 गांवों में काम पूरा हो चुका है, जबकि 31 गांवों में काम जारी है। दक्षिणी हरियाणा में पानी की समस्या को दूर करने के लिए रैनी वेल और नई जलापूर्ति योजनाओं पर भी काम चल रहा है। इनसे पलवल, नूंह, हथीन और फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के कई गांवों को लाभ मिलेगा।

89 शहरों में जलभराव से निपटने की तैयारी

मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए प्रदेश के 89 शहरों में ड्रेनों और सीवरेज नेटवर्क की सफाई और निगरानी की गई। डीवाटरिंग पंप और जनरेटर भी तैयार रखे गए। विभाग के अनुसार, इन प्रयासों से कई स्थानों पर जमा पानी की निकासी में लगने वाला समय 30 से 40 फीसदी तक कम हुआ है। गर्मी के मौसम में जलापूर्ति की निगरानी के लिए अधिकारियों को लगातार फील्ड पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय अधिकारियों के व्हाट्सऐप ग्रुप पर मिलने वाली शिकायतों की एक्शन टेकन रिपोर्ट रोजाना देखी जा रही है। विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-56781 पर मिलने वाली शिकायतों के शीघ्र समाधान के निर्देश भी हैं।

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