फिलहाल हरियाणा के डीजीपी बने रहेंगे मनोज यादव

सीएम ने गृह मंत्री-डीजीपी विवाद का किया पटाक्षेप

फिलहाल हरियाणा के डीजीपी बने रहेंगे मनोज यादव

दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू

चंडीगढ़, 28 फरवरी

हरियाणा के डीजीपी मनोज यादव की 'कुर्सी' पर फिलहाल कोई संकट नहीं है। सरकार जब तक चाहेगी वे प्रदेश में अपनी सेवाएं देंगे। भले ही, अब वे केंद्र सरकार के अधिकारी हैं, लेकिन राज्य सरकार उन्हें आगामी आदेशों तक एक्सटेंशन दे चुकी है और इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को सूचित भी किया जा सकता है। उनकी जगह नये डीजीपी के लिए पैनल तो बनेगा, लेकिन उसमें अभी दो से तीन महीने लग सकते हैं। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने गृह मंत्री अनिल विज और डीजीपी मनोज यादव के बीच चल रहे विवाद का पटाक्षेप कर दिया है। विज खुलकर डीजीपी के खिलाफ हैं और गृह सचिव राजीव अरोड़ा को नये डीजीपी के लिए पैनल बनाकर यूपीएससी में भेजने के आदेश दे चुके हैं। 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी मनोज यादव हरियाणा कैडर के अधिकारी हैं। वे लम्बे समय तक केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर रहे। केंद्र सरकार ने उन्हें आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) में मर्ज भी कर लिया।

ऐसे में दो साल पहले हरियाणा सरकार के आग्रह पर उन्हें प्रतिनियुक्ति पर हरियाणा का डीजीपी बनाकर भेजा गया। केंद्र ने दो वर्षों के लिए मनोज यादव की सेवाएं हरियाणा को सौंपी थी। उनका दो वर्ष का कार्यकाल 23 फरवरी को पूरा हो चुका है, मगर इससे पहले ही खट्टर सरकार ने उन्हें आगामी आदेशों तक के लिए एक्सटेंशन दे दी। 23 फरवरी को ही विज ने गृह सचिव को पत्र लिखा और 2 मार्च से डीजीपी की पोस्ट को खाली समझने को भी कहा।

इस बीच, गृह सचिव ने विज की चिट्ठी के बदले भेजे अपने जवाब में सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी पद पर कम से कम 2 साल की नियुक्ति अनिवार्य की है। अधिकतम पीरियड कितना भी हो सकता है। गृह सचिव ने इस मामले में लीगल राय लेने का आग्रह भी किया। इस फाइल पर नोटिंग करके विज यह कहते हुए लौटा चुके हैं कि जब नियुक्ति ही दो वर्षों के लिए हुई तो फिर उसमें कानूनी राय लेने की कोई जरूरत नहीं है।

इस बीच, रविवार को अपने आवास पर मीडिया से 'चाय पर चर्चा' के दौरान सीएम ने कहा, 'मनोज यादव का केंद्र में मर्ज हो चुका है। उन्हें दो वर्षों के लिए हरियाणा लाया गया था। दो साल पूरे होने से पहले ही सरकार ने उन्हें आगामी आदेशों तक एक्सटेंशन दे दी। इसके लिए केंद्र को भी सूचित किया जा चुका है। केंद्र सरकार को कोई परेशानी नहीं है'। सीएम ने अपने पुराने प्रधान सचिव राजेश खुल्लर का जिक्र करते हुए कहा, 'खुल्लर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर वित्त विभाग में थे। मैंने खुद उस समय वित्त मंत्री अरुण जेटली से उन्हें हरियाणा में भेजने का आग्रह किया था'।

शराब-रजिस्ट्री घोटाले की रिपोर्ट पर हो रहा अध्ययन

जहरीली शराब से 47 लोगों की मौत और अवैध शराब तस्करी से जुड़ी एडीजीपी श्रीकांत जाधव की अध्यक्षता वाली एसआईटी की रिपोर्ट सीएम के पास पहुंच चुकी है। गृह मंत्री अनिल विज की सिफारिशें भी इस रिपोर्ट के साथ हैं। इसी तरह से राज्य के सभी छह मंडलों के आयुक्तों की रजिस्ट्री घोटाले से जुड़ी रिपोर्ट भी डिप्टी सीएम दुष्यंत सिंह चौटाला के माध्यम से सीएम के पास आई है। इन रिपोर्ट के बारे में पूछने पर सीएम ने कहा, 'अभी अध्ययन चल रहा है। अधिकारी रिपोर्ट पर स्टडी कर रहे हैं। फिलहाल इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता'।

लव जिहाद से जुड़े बिल का मसौदा भी पहुंचा

सीएम ने बताया कि गृह मंत्रालय की ओर से लव जिहाद के मामलों से निपटने के लिए बनाए जाने वाले कानून का मसौदा उनके पास पहुंच गया है। निजी व सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई आंदोलनकारियों से करने के लिए भी सरकार कानून बनाएगी। इसका ड्रॉफ्ट बिल भी गृह मंत्री अनिल विज की ओर से सीएमओ में भिजवाया गया है। सीएम ने कहा कि विचार-विमर्श व कानूनी राय के बाद इन दोनों मुद्दों पर फैसला होगा। हमारी कोशिश रहेगी कि बजट सत्र में ही इससे जुड़े बिल पेश किए जाए।

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