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कांग्रेस सरकार में नियमों को तोड़कर दिए गए कालोनियों को लाइसेंस!

अकेले गुरुग्राम में सैकड़ों कालोनियां, लाखों लोग जूझ रहे समस्याओं से

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मुख्यमंत्री नायब सैनी।
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गुरुग्राम, जिसे देश का तेजी से बढ़ता कॉरपोरेट हब और साइबर सिटी कहा जाता है, आज अपने लाइसेंस कॉलोनियों के विवाद की वजह से सुर्खियों में है। सैकड़ों कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोग रोजाना दो-करम और चार-करम जैसी संकरी गलियों से गुजरने को मजबूर हैं, जिनसे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहन भी गुजर नहीं सकते।

यह समस्या केवल वास्तुशिल्प की कमी नहीं, बल्कि पूर्व कांग्रेस सरकार की लापरवाही का नतीजा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने बजट भाषण में इसे उजागर किया है। उन्होंने ना केवल इसका खुलासा किया है बल्कि पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा कॉलोनियों को लाइसेंस और सीएलयू दिए जाने के आधार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सीएलयू व लाइसेंस किस आधार पर और कैसे जारी किए गए, इसके लिए उस समय के मंत्री को जवाब देना चाहिए।

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सीएम ने अपने बजट भाषण में स्पष्ट किया कि यह संकट अचानक नहीं आया। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए कॉलोनियों को लाइसेंस और सीएलयू जारी किया, जबकि कॉलोनियों की एप्रोच रोड अधूरी थी। उन्होंने यह भी कहा कि जनता आज ट्रैफिक जाम, संकरी गलियों और सुरक्षा जोखिम झेल रही है।

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चौटाला के मास्टर प्लान को किया सही ठहराया

नायब सरकार ने साफ किया कि चौटाला सरकार के दौरान बनाए गए मास्टर प्लान-2021 को सही ठहराया गया है। एचएसवीपी द्वारा 24 मीटर सड़कें अधिग्रहित करने और आंतरिक रोड नेटवर्क तैयार करने की व्यवस्था चौटाला शासन में बनी हुई थी। समस्या तब हुई जब पूर्व कांग्रेस सरकार ने कॉलोनियों को लाइसेंस और सीएलयू जारी करते समय इन रोड अधूरेपन की अनदेखी की। इतना ही नहीं, मास्टर प्लान में बदलाव भी किया गया।

सेक्टर 58 से 115 तक कॉलोनियों का हाल

गुरुग्राम के सेक्टर 58 से 115 तक कॉलोनियों की स्थिति सबसे खराब है। लोग रोजाना जाम, संकरी गलियों और सुरक्षा जोखिम का सामना कर रहे हैं। बिल्डरों ने करोड़ों में फ्लैट और प्लॉट बेचे, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी बरकरार है।

टीडीआर पॉलिसी ने आंशिक राहत दी

सैनी ने बताया कि समस्या गंभीर थी, इसलिए 2016 में मनोहर सरकार ने ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) पॉलिसी लागू की गई। मकसद था कि सड़क निर्माण के लिए बिना विवाद जमीन हासिल की जा सके। 2021 में संशोधित पॉलिसी लाई गई, लेकिन अब तक केवल 140 एकड़ जमीन ही उपलब्ध हो पाई। उन्होंने कहा कि पिछली गड़बड़ियां इतनी गहरी थीं कि टीडीआर भी पूरी तरह समाधान नहीं दे सका।

2026-27 में स्थायी समाधान का भरोसा

सीएम ने भरोसा दिलाया कि 2026-27 में 24 मीटर सड़क निर्माण के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण खुद जमीन अधिग्रहित करेगा और लागत बिल्डरों से वसूली जाएगी ताकि जनता पर बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि गलती जिनकी है, खर्च भी वही उठाएंगे। जनता को राहत देना हमारी जिम्मेदारी है। सीएम ने दो टूक कहा कि यह समस्या सिर्फ वास्तुशिल्प की नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक लापरवाही का परिणाम है।

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