Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

जींद का लिंगानुपात नौ महीने में 789 से बढ़कर 898 पहुंचा, 109 अंकों का सुधार

स्वास्थ्य विभाग की सख्त निगरानी, PNDT कार्रवाई और जागरूकता अभियान से सुधार, कुछ पंचायतों ने बेटी जन्म पर 2100 रुपये प्रोत्साहन शुरू किया

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

जींद जिले के गिरते लिंगानुपात को लेकर स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी निगरानी और लगातार चलाए गए जागरूकता अभियानों का असर अब दिखाई देने लगा है। इस साल जनवरी में जिले का लिंगानुपात 789 तक खिसक गया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए निगरानी कड़ी की। कई महीनों की लगातार निगरानी और पीएनडीटी एक्ट को लेकर की गई कार्रवाई व जागरूकता का नतीजा है कि अब जिले का लिंगानुपात बढ़कर 898 पर पहुंच गया है। जनवरी के मुकाबले जिले के लिंगानुपात में 109 अंकों की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।

जींद जिले के लिंगानुपात में जनवरी महीने में आई भारी गिरावट के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गर्भ में लिंग जांच पर रोक और पीएनडीटी एक्ट के पालन को लेकर निगरानी और तेज कर दी थी। उस समय डिप्टी सिविल सर्जन और पीएनडीटी के प्रभारी रहे डॉ. पालेराम कटारिया ने निगरानी अभियान की कमान संभाली। विभाग की टीमों ने लगातार गतिविधियों पर नजर रखी और लोगों को बेटी के जन्म के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए।

Advertisement

जागरूकता अभियान और पंचायतों की पहल से भी बढ़ा लिंगानुपात

जींद पीएनडीटी की जिला टास्क फोर्स के प्रभारी डॉ. रविंद्र मलिक ने बताया कि विभाग के लगातार प्रयासों और जागरूकता अभियानों के कारण जिले के लिंगानुपात में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली का जिला टास्क फोर्स को लगातार मार्गदर्शन मिल रहा है। विभाग की ओर से लिंग जांच को रोकने के साथ-साथ लोगों को बेटियों के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।

Advertisement

कुछ पंचायतों ने की नई पहल

डॉ. रविंद्र मलिक ने बताया कि जिले की कुछ पंचायतों ने अपने स्तर पर बेटी के जन्म को प्रोत्साहित करने की पहल की है। इन पंचायतों ने गांव में बेटी के जन्म पर पंचायत की तरफ से 2100 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का फैसला लिया है। इससे इन गांवों में बेटियों के जन्म को लेकर सकारात्मक माहौल बना है और लिंगानुपात में भी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल दूसरे गांवों में भी शुरू हो, इसके लिए प्रशासन से अनुरोध किया जा रहा है।

लिंगानुपात में कभी प्रदेश में सिरमौर रहा है जींद

लिंगानुपात के मामले में जींद जिला कभी पूरे प्रदेश में सिरमौर रहा है। यह दौर साल 2023-24 का था, जब लगभग डेढ़ साल तक जींद जिला लिंगानुपात में प्रदेश में पहले स्थान पर रहा था, जबकि कई महीनों तक दूसरे स्थान पर भी मजबूती से बना रहा था। इसकी नींव साल 2016 में जींद के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ संजय दहिया ने रखी थी, जिन्होंने खुद अपने घर में एक बेटी से ही संतोष कर लिया था।

डॉ. संजय दहिया के जींद में सिविल सर्जन नियुक्त होने से पहले जींद जिले का लिंगानुपात 800 से भी कम था और जींद जिला लिंगानुपात के मामले में रेड जोन में था। डॉ दहिया ने जींद में लिंगानुपात सुधारने पर फोकस किया और इसका नतीजा यह रहा था कि जींद जिले का लिंगानुपात 970 को पार कर गया था। इसमें 2017 में जींद में डीसी के पद पर नियुक्त हुए अमित खत्री ने स्वास्थ्य विभाग की पूरी मदद की थी, जिसके लिए अमित खत्री को प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल ने चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में सम्मानित किया था।

बाद में डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. पालेराम कटारिया ने पीएनडीटी की कमान संभाली। उन्होंने लिंगानुपात में सुधार को और आगे बढ़ाते हुए जिले के लिंगानुपात को 998 तक पहुंचाने मे कामयाबी हासिल की थी। डॉ. कटारिया खुद दो बेटियों के पिता हैं और बेटियों को बेटों की तरह मानने में दूसरों के लिए एक नजीर जींद के पूर्व सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया की तरह हैं। इसके बाद जिले के लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई और इस साल जनवरी में यह 789 तक पहुंच गया था।

लिंगानुपात में फिर हुआ सुधार

जींद जिले के लिंगानुपात में एक बार फिर सुधार शुरू हुआ है इस साल जनवरी महीने के मुकाबले पिछले महीने जिले के लिंगानुपात के 898 तक पहुंचने को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

Advertisement
×