Jind News: ट्रेड डील के विरोध में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, सैकड़ों ने दी गिरफ्तारियां
रानी तालाब से लोक शिवालय तक गूंजे सरकार विरोधी नारे, किसानों ने कहा- अमेरिका के हाथों गिरवी रखे जा रहे खेती और किसान
Jind News: सोमवार को जींद के रानी तालाब से लेकर लघु सचिवालय परिसर तक किसानों और मजदूरों के प्रदर्शन से जींद की सड़कों पर बड़ी हलचल रही। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों किसान और मजदूर रानी तालाब पर एकत्रित हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय परिसर पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारी देने का ऐलान किया तो पुलिस और रोडवेज की बसें बुला ली गईं। देखते ही देखते सैकड़ों किसानों और मजदूरों को बसों में बैठाकर जींद पुलिस लाइन ले जाया गया।
भारत- अमेरिका ट्रेड डील में भारत के किसानों के हितों को रखा गिरवी
संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि केंद्र सरकार ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देश के किसानों के हितों के साथ समझौता किया है। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी फसलों के लाभकारी दाम सुनिश्चित करने के बजाय ऐसी नीतियां लागू कर रही है, जिनसे खेती का संकट और गहरा जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जोगेंद्र घासीराम नैन ने कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देश के किसानों ने एक साल से अधिक समय तक आंदोलन किया था। किसानों के आंदोलन के दबाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया था और किसानों से कई वादे किए थे, लेकिन करीब पांच साल बीत जाने के बावजूद सरकार ने किसानों से किए वादों को पूरा नहीं किया।
ट्रेड डील से बर्बाद हो जाएगा देश का किसान
नैन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब चोर दरवाजे से उन्हीं कृषि कानूनों को लागू करने की कोशिश कर रही है, जिन्हें किसानों ने अपने लंबे और ऐतिहासिक आंदोलन से वापस करवाया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील के लागू होने के बाद अमेरिका से कृषि उत्पादों का आयात बढ़ने की स्थिति में भारतीय किसानों को अपनी फसलों के उचित दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसान पहले ही महंगी खाद, बीज, डीजल और कृषि लागत के कारण आर्थिक संकट में है। खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि फसलों के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़ रहे। ऐसे में अगर विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिया गया, तो किसानों के सामने अपनी उपज बेचने का संकट खड़ा हो जाएगा।
नैन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की नीतियों से किसान लगातार कर्ज के बोझ में दबता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा किसान और किसानी को कमजोर करने की है, ताकि किसानों की जमीन बड़े पूंजीपतियों के हाथों में पहुंच सके और किसान अपने ही खेतों में मजदूर बनने को मजबूर हो जाए।
उन्होंने कहा कि किसान और मजदूर संगठन इस लड़ाई को किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटने देंगे। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और जरूरत पड़ी तो इसे फिर बड़े किसान आंदोलन में तब्दील किया जाएगा।
18 सितंबर को भाजपा नेताओं के घरों के बाहर प्रदर्शन
जोगेंद्र नैन ने कहा कि ट्रेड डील के विरोध में आंदोलन का अगला चरण 18 सितंबर को होगा। इस दिन भाजपा के सांसदों और विधायकों के घरों के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों और ट्रेड डील के खिलाफ देशभर में आंदोलन को मजबूत किया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि 26 नवंबर से देश में दोबारा बड़े किसान आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है। किसान और मजदूर संगठनों के बीच इसको लेकर लगातार बातचीत चल रही है।
किसान नेता इकबाल सिंह, सुधीर शास्त्री सहित अन्य नेताओं ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील किसानों के हितों पर सीधा कुठाराघात है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसान और मजदूर संगठन लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं।यह संस्करण प्रिंट अखबार की मुख्य खबर के लिए ज्यादा प्रभावी रहेगा—लीड में गिरफ्तारी और मौके का माहौल है और उसके बाद किसान नेताओं के आरोप व आंदोलन के अगले चरण को क्रम से रखा गया है।

