उद्योग बढ़ा, पर नौकरियां कितनी मिलीं? हुड्डा के सवाल पर केंद्र ने नहीं दिया सीधा आंकड़ा
2014 से 2025-26 तक विनिर्माण-सेवा क्षेत्र में सालाना रोजगार सृजन का ब्योरा मांगा था
Employment in India : देश में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के बीच इन क्षेत्रों में साल-दर-साल कितनी नौकरियां पैदा हुईं, इसका सीधा जवाब संसद में नहीं मिला। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने 2014 से 2025-26 तक दोनों क्षेत्रों में हर साल हुए रोजगार सृजन का आंकड़ा मांगा था। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इसके बजाय 2017-18 के बाद का श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) और कुल कामगारों में विनिर्माण व सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी का ब्योरा दिया।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी में डब्ल्यूपीआर 2017-18 में 46.8 फीसदी था, जो 2023-24 में बढ़कर 58.2 फीसदी हुआ। हालांकि 2024 में यह 57.7 और 2025 में 57.4 फीसदी रहा। कुल कामगारों में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 2017-18 में 12.1 फीसदी थी। यह 2020-21 में घटकर 10.9 फीसदी हो गई, हालांकि 2025 में फिर 12.1 फीसदी पर पहुंच गई। सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 2017-18 में 31.1 फीसदी थी। महामारी के दौर में यह 29.6 फीसदी तक आई और 2022-23 में 28.9 फीसदी रही। 2025 में यह बढ़कर 31.8 फीसदी हो गई।
सरकार ने योजनाओं के रोजगार गिनाए
सरकार ने सीधे सालाना रोजगार आंकड़े देने के बजाय रोजगार बढ़ाने वाली योजनाओं के परिणाम जरूर गिनाए। 31 मार्च 2026 तक पीएलआई के तहत 892 आवेदन मंजूर किए गए और सरकार के अनुसार इससे 14.15 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए। स्टार्टअप इंडिया के तहत 30 जून 2026 तक मान्यता प्राप्त 2,40,092 स्टार्टअप में 24.62 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का दावा किया गया है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत निवेशकों द्वारा घोषित परियोजनाओं में करीब 1.29 लाख संभावित रोजगार की क्षमता बताई गई है।

