सरकार नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी... पंचायती राज में इंजीनियरों के पद घटाने की तैयारी, विरोध में 7 को हड़ताल
130 जेई के पद खत्म करने का प्रस्ताव, एसडीई-जेई को बीडीपीओ के अधीन करने की तैयारी; 7 सितंबर को कलम छोड़ेंगे इंजीनियर, 8 से 10 तक जिला मुख्यालयों पर हड़ताल
Haryana Engineers Protest : हरियाणा में गांवों में विकास कार्यों की तकनीकी निगरानी करने वाले पंचायती राज विभाग के इंजीनियरों के पद घटाने की तैयारी के खिलाफ इंजीनियरों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। सरकार के प्रस्ताव में कनिष्ठ अभियंताओं (जेई) के 130 पद खत्म करने और उपमंडल अभियंता (एसडीई) व जेई को कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) के बजाय खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) के अधीन करने की बात है।
इंजीनियरों ने इसका विरोध करते हुए 7 सितंबर को कलम छोड़ हड़ताल और 8 से 10 सितंबर तक जिला मुख्यालयों पर हड़ताल की घोषणा की है। मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। एसोसिएशन के राज्य प्रधान महेंद्र सिंह यादव ने भाजपा विधायक ओमप्रकाश यादव को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने मांग की है कि इंजीनियरिंग विंग से जुड़े पदों और कामकाज में बदलाव का फैसला लेने वाली समिति में विभाग के तकनीकी अधिकारियों को भी शामिल किया जाए।
संगठन ने मुख्य अभियंता पंचायती राज के साथ एक अधीक्षण अभियंता और एक कार्यकारी अभियंता को समिति में शामिल करने की मांग की है। महेंद्र सिंह यादव ने कहा कि सरकार यदि प्रस्ताव पर पुनर्विचार नहीं करती और इंजीनियरों की मांगों को अनदेखा करती है तो 10 सितंबर के बाद आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जाएगा।
809 में से 130 जेई हटाने का विरोध
एसोसिएशन के मुताबिक पंचायती राज इंजीनियरिंग विंग में जेई के 809 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 130 पद खत्म करने का प्रस्ताव है। संगठन का कहना है कि एक जेई के जिम्मे औसतन करीब 10 गांव आते हैं। ऐसे में पद घटाने से गांवों में होने वाले निर्माण और विकास कार्यों की निगरानी पर असर पड़ेगा। इंजीनियरों का कहना है कि कर्मचारियों की संख्या कम करने के बजाय तकनीकी व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।
काम लेने का तरीका भी बदलने का विरोध
एसोसिएशन को सबसे ज्यादा आपत्ति एसडीई और जेई की रिपोर्टिंग व्यवस्था बदलने पर है। प्रस्ताव के अनुसार इन्हें एक्सईएन के अधीन रखने के बजाय बीडीपीओ के अधीन किया जा सकता है। इंजीनियरों का तर्क है कि तकनीकी काम करने वाले अधिकारियों को तकनीकी अधिकारियों के अधीन ही रखा जाना चाहिए। संगठन ने एक्सईएन से उनके वित्तीय अधिकार वापस लेने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है।
गुणवत्ता जांच के कार्यालय मजबूत करने की मांग
एसोसिएशन ने रोहतक, पंचकूला और गुरुग्राम में चल रहे विजिलेंस और क्वालिटी कंट्रोल कार्यालयों को खत्म करने या कमजोर करने के बजाय मजबूत करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि गांवों में बनने वाली सड़कों, भवनों और दूसरी विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए अलग तकनीकी निगरानी व्यवस्था जरूरी है। कार्यकारी अभियंता कार्यालय में वर्तमान में 14 स्वीकृत पद हैं। प्रस्ताव में इनमें से केवल छह पद रखने की बात कही गई है। एसोसिएशन ने इसे भी अव्यावहारिक बताते हुए मौजूदा व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
चार मुख्य अभियंता और एक नए शीर्ष पद की मांग
इंजीनियरों ने पंचायती राज विभाग में इंजीनियर-इन-चीफ का नया पद बनाने और कम से कम चार मुख्य अभियंता के पद बनाए रखने की मांग की है। राजस्व शाखा में अधीक्षण अभियंता का पद भी खत्म न करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि ग्रामीण विकास से जुड़े काम लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में इंजीनियरिंग विंग को छोटा करने के बजाय मजबूत करने की जरूरत है।
31 अगस्त से काली पट्टी बांधेंगे
एसोसिएशन ने सरकार को अपनी मांगों पर विचार करने के लिए चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम दिया है। 28 अगस्त तक राज्य और जिला स्तर पर जनप्रतिनिधियों तथा जिला प्रशासन को ज्ञापन दिए जाएंगे। 31 अगस्त से 3 सितंबर तक सभी तकनीकी अधिकारी और जेई काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। 7 सितंबर को कलम छोड़ हड़ताल होगी। इसके बाद 8 से 10 सितंबर तक जिला मुख्यालयों पर हड़ताल की जाएगी।

