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बीबीएमबी नोटिफिकेशन पर हुड्डा बोले - हरियाणा के हकों पर सीधा प्रहार

एसवाईएल और पानी के मुद्दे पर केंद्र व राज्य सरकार घिरी

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भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) को लेकर केंद्र सरकार के हालिया गजट नोटिफिकेशन ने हरियाणा की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने इस फैसले को हरियाणा के हितों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंगलवार को नयी दिल्ली में पत्रकारों से बात में हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के गठन के समय बीबीएमबी के संचालन के लिए जो नियम बनाए गए थे, उनमें राज्यों के बीच संतुलन और हितों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया था।उन्होंने बताया कि पहले यह व्यवस्था थी कि सिंचाई से जुड़ा सदस्य हरियाणा से, बिजली से जुड़ा सदस्य पंजाब से और अध्यक्ष किसी तीसरे राज्य से नहीं होगा। लेकिन नई नोटिफिकेशन में इन परंपराओं को समाप्त करते हुए किसी भी राज्य के व्यक्ति को किसी भी पद पर नियुक्त करने का प्रावधान कर दिया गया है। हुड्डा का कहना है कि इस बदलाव से हरियाणा के अधिकार कमजोर हो सकते हैं और भविष्य में पानी व संसाधनों को लेकर विवाद बढ़ने की संभावना है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के निर्णय पहले भी हरियाणा के हितों को प्रभावित कर चुके हैं। एसवाईएल नहर के मुद्दे को उठाते हुए हुड्डा ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही हरियाणा के पक्ष में फैसला दे चुका है, लेकिन इसके बावजूद राज्य को उसका हक नहीं मिल पाया है। उन्होंने इसे जनता के साथ विश्वासघात करार दिया।

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हुड्डा ने यह भी आरोप लगाया कि बीबीएमबी में हरियाणा के कोटे की नौकरियों को धीरे-धीरे खत्म किया गया, लेकिन राज्य सरकार ने इस पर कोई ठोस आपत्ति नहीं जताई। उनके अनुसार, यह चुप्पी प्रदेश के हितों के खिलाफ है। किसानों के मुद्दे पर भी नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मंडियों में खरीद प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया गया है कि किसान परेशान हो रहे हैं। पोर्टल रजिस्ट्रेशन से लेकर गेट पास, बायोमेट्रिक और अन्य औपचारिकताओं के कारण फसल बेचने में देरी हो रही है।

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