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एचएयू में नियुक्ति विवाद : पीएम तक पहुंचा मामला, नियमों को ताक पर रख डीन-डायरेक्टर के प्रभार बांटने का आरोप

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में डीन और डायरेक्टर के पदों पर प्रभार सौंपने में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को शिकायत...

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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में डीन और डायरेक्टर के पदों पर प्रभार सौंपने में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को शिकायत भेजकर मामले में हस्तक्षेप व जांच की मांग की गई है। आरोप है कि विश्वविद्यालय अधिनियम और नियमावली को ताक पर रखकर ये नियुक्तियां की गई हैं।

एडवोकेट हर्षदीप सिंह गिल ने अपनी शिकायत में बताया है कि विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत किसी भी डीन या डायरेक्टर को दूसरा कार्यकाल नहीं दिया जा सकता। यहां तक कि जो अधिकारी किसी अन्य विश्वविद्यालय में भी अपना एक कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, वे दोबारा इन पदों के पात्र नहीं होते। इसके बावजूद कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर नियमों का सीधा उल्लंघन किया गया है।

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शिकायत के अनुसार, डॉ. एसके पाहुजा एचएयू में डीन (कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर) के रूप में अपना कार्यकाल पहले ही पूरा कर चुके हैं। वर्तमान में वे सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति पर हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें डायरेक्टर स्टूडेंट्स वेलफेयर का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इसी तरह, वर्तमान में डीन (कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर) के पद पर कार्यरत डॉ. आरके गोयल इससे पहले करनाल स्थित महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर ऑफ रिसर्च रह चुके हैं। शिकायतकर्ता का तर्क है कि नियमों के मुताबिक इन्हें दोबारा इस स्तर का पद नहीं दिया जा सकता।

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विज्ञापन की शर्तों का दिया हवाला

शिकायतकर्ता ने विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन संख्या 1/2026 का हवाला देते हुए कहा कि डीन पद की पात्रता शर्तों में यह बिल्कुल स्पष्ट किया गया है कि एक कार्यकाल पूरा कर चुके संकाय सदस्य दूसरे कार्यकाल के पात्र नहीं होंगे। एडवोकेट गिल का कहना है कि विश्वविद्यालय में कई अन्य योग्य और वरिष्ठ प्रोफेसर मौजूद हैं, जिन्हें इन पदों पर मौका मिलना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे फैसले पारदर्शिता और वरिष्ठता के सिद्धांतों को दरकिनार करते हैं। शिकायत में प्रधानमंत्री से अपील की गई है कि इस मामले की जांच कराई जाए, कुलपति से स्पष्टीकरण लिया जाए और अनियमितता साबित होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

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