Haryana Yamuna Rejuvenation : हरियाणा में यमुना को साफ करने की कवायद तेज, सीवेज से तालाबों तक समयबद्ध होगा काम
13 जल स्रोतों के पुनरुद्धार का लक्ष्य, गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत कई शहरों में नए एसटीपी और औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र लगेंगे
Haryana Yamuna Rejuvenation : हरियाणा सरकार ने यमुना और उससे जुड़े जल स्रोतों के प्रदूषण को रोकने के लिए सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, ठोस कचरे और जल निकायों के पुनरुद्धार का काम तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई यमुना कार्य योजना की समीक्षा बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और उनकी समयसीमा की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने और परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में सोनीपत, पानीपत, करनाल, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और यमुनानगर सहित विभिन्न शहरी क्षेत्रों में चल रहे प्रदूषण नियंत्रण कार्यों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि यमुना की स्वच्छता के लिए सीवेज उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस कचरा प्रबंधन और जल स्रोतों का पुनरुद्धार एक साथ प्रभावी ढंग से करना जरूरी है।
गुरुग्राम में चार बड़े एसटीपी, फरीदाबाद में भी काम तेज
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने बताया कि गुरुग्राम में चार प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) विभिन्न चरणों में हैं। इनमें धनवापुर में 100 एमएलडी, बहरामपुर में 100 एमएलडी, नौरंगपुर में 40 एमएलडी और सेक्टर-107 में 100 एमएलडी क्षमता के संयंत्र शामिल हैं। इन परियोजनाओं की वित्तीय और तकनीकी निविदाएं अगस्त और सितंबर में खोली जानी प्रस्तावित हैं।
फरीदाबाद में 20 एमएलडी क्षमता वाले मिर्जापुर एसटीपी का काम 30 अगस्त तक शुरू करने का लक्ष्य है। वहीं, 20 एमएलडी क्षमता वाली सूरजकुंड परियोजना की तकनीकी निविदाएं 24 अगस्त तक खोली जानी प्रस्तावित हैं। सोनीपत के कुंडली में 7.5 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू करने का लक्ष्य है। पानीपत के समालखा में प्रस्तावित 4 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी की वित्तीय निविदाएं 25 अगस्त तक खोली जानी प्रस्तावित हैं।
औद्योगिक अपशिष्ट के उपचार की व्यवस्था होगी मजबूत
फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में प्रस्तावित 50 एमएलडी क्षमता वाले साझा औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र के लिए निविदाएं जारी की जा चुकी हैं। गुरुग्राम के सेक्टर-34 में 20 एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र की तकनीकी निविदाएं 3 अगस्त को खोली गईं। इसके अलावा बादशाहपुर में 15 एमएलडी और सेक्टर-37 में 9 एमएलडी क्षमता वाले साझा उपचार संयंत्र सहित अन्य परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।
यमुना किनारे बसे गांवों में सीवेज प्रबंधन पर भी जोर दिया गया है। सोनीपत, करनाल और पानीपत के गांवों में थ्री-पोंड सिस्टम तथा छोटे एसटीपी के माध्यम से सीवेज का उपचार किया जाएगा। सरकार के अनुसार यमुना के पुनरुद्धार के लिए शहरी क्षेत्रों के साथ नदी किनारे बसे गांवों में भी प्रभावी सीवेज प्रबंधन जरूरी है।
19.12 हेक्टेयर क्षेत्र के 13 जल स्रोत होंगे पुनर्जीवित
यमुना से जुड़े स्थानीय जल स्रोतों के पुनरुद्धार के लिए फरीदाबाद, करनाल, पानीपत और सोनीपत के 13 जल स्रोत चिन्हित किए गए हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 19.12 हेक्टेयर है। इन जल स्रोतों में प्रदूषण का मुख्य कारण घरेलू सीवेज पाया गया है। इनके पुनरुद्धार का काम 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
ठोस कचरा प्रबंधन को भी यमुना कार्य योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। वर्तमान योजना में 33 शहरी स्थानीय निकाय शामिल हैं। इनमें 27 निकायों में 22 वर्ष की अवधि के लिए ठोस कचरा प्रबंधन के अनुबंध दिए जा चुके हैं, जबकि छह निकायों में निविदा प्रक्रिया जारी है।
650 टन प्रतिदिन क्षमता के तीन बायोगैस संयंत्र
कचरे से संसाधन जुटाने के लिए तीन नए बायोगैस संयंत्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। इनकी कुल क्षमता 650 टन प्रतिदिन होगी। इनमें सोनीपत के राई-जाखौली में 400 टन प्रतिदिन, फरीदाबाद के मोहना-बल्लभगढ़ में 100 टन प्रतिदिन और यमुनानगर में 150 टन प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र शामिल है। सोनीपत परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। फरीदाबाद परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार है, जबकि यमुनानगर परियोजना की निविदा के बाद तकनीकी समीक्षा की जा रही है।
बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

