प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर तैयार करेगा हरियाणा : The Dainik Tribune

प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर तैयार करेगा हरियाणा

प्रदेश में चल रहे दो प्रशिक्षण केंद्र, तीन और स्थापित करने का निर्णय

प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर तैयार करेगा हरियाणा

चंडीगढ़ में मुख्य सचिव संजीव कौशल अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए।

चंडीगढ़, 24 नवंबर (ट्रिन्यू)

हरियाणा के उन किसानों को सरकार प्रोत्साहित करेगी, जो रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाएंगे। प्राकृतिक खेती के बारे में किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए दो प्रशिक्षण केंद्र चल रहे हैं। अब सरकार ने ऐसे तीन और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से जुड़ी योजनाओं को लेकर मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बृहस्पतिवार को यहां अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक में कृषि विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ़ सुमिता मिश्रा, विभाग के महानिदेशक हरदीप सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कौशल ने अधिकारियों से कहा कि समय-समय पर प्राकृतिक खेती के सकारात्मक परिणामों के बारे में जानकारी मिल रही है। अभी तक कहीं भी प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर उपलब्ध नहीं हैं। हरियाणा को इस दिशा में कदम बढ़ाने होंगे और प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर तैयार करने होंगे। रिसर्च पेपर में इस पद्धति की पूरी प्रक्रिया, समयावधि और परिणामों की विस्तृत जानकारी होगी। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि इसके लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति और रिसर्च निदेशक से बातचीत कर जल्द से जल्द इस कार्य को अमलीजामा पहनाया जाए।

प्राकृतिक खेती का उद्देश्य रसायन मुक्त कृषि, प्रकृति के अनुरूप जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देना और पर्यावरण एवं जलवायु प्रदूषण में कमी लाते हुए इस पद्धति को स्थाई आजीविका के रूप में स्थापित करना है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को जागरूक और प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र के गुरुकुल और करनाल के घरौंडा में प्रशिक्षण केंद्र चल रहे हैं। अब चौ़ चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, जींद के हमेटी, तथा सिरसा के मंगियाना में भी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होंगे।

प्राकृतिक खेती का मूल उद्देश्य खान-पान को बदलना है, इसके लिए खाद्यान ही औषधि की धारणा को अपनाना होगा। किसानों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए हर खंड में एक प्रदर्शनी खेत में प्राकृतिक खेती करवाई जाएगी। अब तक 5 जिलों में इस प्रकार के प्रदर्शनी खेत तैयार किये जा चुके हैं।

देसी गाय खरीद पर 25 हजार सब्सिडी : प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देसी गाय की खरीद पर 25 हजार तक की सब्सिडी व प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए चार बड़े ड्रमों के लिए हर किसान को 3 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। ऐसा करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है। इतना ही नहीं, प्राकृतिक खेती के उत्पादों की पैकिंग सीधे किसान के खेतों से ही हो, ऐसी योजना भी तैयार की गई है।

प्रथम चरण में 2992 ने कराया पंजीकरण

प्राकृतिक खेती के लिए प्रथम चरण में सरकार की ओर से प्रशिक्षण और जागरूकता पर अधिक जोर दिया जा रहा है, ताकि किसान इस पद्धति को अच्छे से समझ सकें। अब तक इस पोर्टल पर 2992 किसानों ने अपना पंजीकरण करवाया है। 1201 किसानों ने रबी सीजन के दौरान प्राकृतिक खेती करने के लिए अपनी सहमति प्रदान कर दी है। 3600 मृदा सैंपल भी एकत्रित किए हैं। प्राकृतिक खेती के लिए अब तक 405 एटीएम, बीटीएम तथा 119 प्र‌गतिशील किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

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