Haryana: लुवास से पढ़ाई, संस्कारम यूनिवर्सिटी से डिग्री! छात्रों में नाराजगी
कॉलेज से विश्वविद्यालय बने झज्जर की संस्कारम वेटनरी कॉलेज के विद्यार्थियों ने जताया विरोध
Sanskaram University: झज्जर के पाटौदा स्थित संस्कारम वेटनरी कॉलेज के विश्वविद्यालय बनने के बाद वहां पहले से पढऩे वाले विद्यार्थियों को डिग्री पूरी करने पर लाला लाजपतराय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) द्वारा डिग्री न जारी करने के फैसले ने उनकी मुसीबतें बढ़ा दी है। विद्यार्थियों ने वेटनरी काउंसिल आफ इंडिया और पशुपालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
विद्यार्थियों ने बताया कि उनका कॉलेज पहले हिसार स्थित लाला लाजपतराय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) से मान्यता प्राप्त था। उन्होंने नीट की परीक्षा पास करके लुवास से डिग्री हासिल करने के लिए संस्कारम कॉलेज आफ वेटनरी साइंसिंज में प्रवेश लिया। लुवास ने 3-4 साल तक पेपर भी लिए और वह निश्चिंत थे कि उनको लुवास से ही डिग्री प्राप्त होगी, लेकिन 2025-26 में संस्कारम कॉलेज यूनिवर्सिटी में बदल गया। इसके बाद लुवास ने फैसला लिया है कि उनके बचे हुए एक-दो साल के पेपर संस्कारम यूनिवर्सिटी ही लेगी और वही डिग्री देगी।
विद्यार्थियों ने कहा कि उन्होंने सरकारी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने का सपना पाला था और अब प्राईवेट यूनिवर्सिटी डिग्री देगी, यह तो उनके साथ अन्याय है। हर वर्ष के सर्टिफिकेट भी उनके दो यूनिवर्सिटियों से होंगे, जो भ्रम की स्थिति पैदा करेंगे।
उन्होंने कहा कि जब महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक से चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी (भिवानी) बनी तो पहले से दाखिल छात्रों को डिग्री महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक ने ही दी थी। उसी तर्ज पर उनको भी 2025-26 से पहले दाखिल विद्यार्थियों को डिग्री भी लुवास से दिलवाई जाए।
छात्रों ने नाम न प्रकाशित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि यदि वे खुलकर सामने आते हैं तो उनको विवि अधिकारी निशाने पर लेकर प्रेक्टिकल में फेल या कम नंबर देकर उनकी डिग्री खराब कर सकते हैं। यदि विवि प्रशासन ने समय पर फैसला नहीं लिया तो मजबूर होकर वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
मामले के बारे में विवि कुलपति प्रोफेसर विनोद कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि इस बारे में विवि के रजिस्ट्रार से बात करना बेहतर होगा। जब विवि के रजिस्ट्रार प्रोफेसर एसएस ढाका से बात की तो उन्होंने कहा कि यह नीतिगत मामला है और फोन पर इस पर बात नहीं की जा सकती।

