Haryana Scam : 504 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में 6 आईएएस समेत 19 पर तीसरी चार्जशीट
पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार और आरके सिंह पहले से न्यायिक हिरासत में; तीसरी चार्जशीट से आरोपी अफसरों की संख्या बढ़ी
Haryana Scam : हरियाणा के सरकारी फंड से जुड़े 504 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में सीबीआई ने बुधवार को तीसरी चार्जशीट दाखिल कर जांच का दायरा और बढ़ा दिया। पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में दाखिल आरोपपत्र में छह आईएएस अधिकारियों समेत 19 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें तीन आईएएस अधिकारी - पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार और आरके सिंह पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और न्यायिक हिरासत में हैं।
तीसरी चार्जशीट के साथ इस मामले में अब तक चार्जशीट किए गए आरोपियों की संख्या 37 हो गई है। चार्जशीट में शामिल छह आईएएस अधिकारियों में विनीत गर्ग, पंकज अग्रवाल, मोहम्मद शाईन, डॉ़ साकेत कुमार, प्रदीप कुमार और रामकुमार (आरके) सिंह के नाम हैं। इनके अलावा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारियों, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारी तथा हरियाणा सरकार और संबंधित संस्थानों से जुड़े नौ अन्य लोगों को आरोपी बनाया है।
बैंक शाखाओं तक पहुंचाई गई सरकारी रकम
सीबीआई के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर आपसी मिलीभगत से सरकारी धन को निकालने और दूसरे खातों में पहुंचाने की पूरी योजना बनाई। जांच में सामने आया कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों व संस्थानों की रकम विभिन्न बैंकों से निकालकर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की चुनिंदा शाखाओं में पहुंचाई गई। आरोप है कि इसके लिए संबंधित शाखाओं में खाते खोले गए और फिर सरकारी धन को ऐसे तीसरे पक्ष के खातों में ट्रांसफर किया गया, जिनका संबंधित सरकारी विभागों से कोई संबंध नहीं था। इसके बाद रकम को कई खातों के जरिए घुमाया गया और उसका एक हिस्सा नकदी में बदल दिया गया। सीबीआई का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया से आरोपियों ने खुद को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया।
आठ विभागों की रकम प्रभावित
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में विकास एवं पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की रकम प्रभावित हुई। चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि सरकारी धन के संचालन में वित्त विभाग के वित्तीय अनुशासन और धोखाधड़ी रोकने संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ। आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल, साक्ष्य नष्ट करने, खातों में हेरफेर और आपराधिक विश्वासघात सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत और आपराधिक कदाचार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
13 अन्य आरोपियों में बैंक और सरकारी अधिकारी
छह आईएएस अधिकारियों के अलावा चार्जशीट में दीप्ति कौशिक, राजेश गोयल, प्रिंस शर्मा, सौरव कुमार, प्रवीण कुमार, सुरेंद्र जैन, सुरेंद्र कौर, अमित कुमार, जुगल किशोर, शमीम अहमद दार, सुधा गोयल, कुलदीप सिंह और चरणजीत सिंह रंधावा को भी आरोपी बनाया गया है। इनमें कुछ आरोपी हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन, विकास एवं पंचायत विभाग, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पंचकूला नगर निगम तथा आईडीएफसी फर्स्ट और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े हैं।
54 छापे, 26 गिरफ्तारियां और 20 करोड़ का सोना
सीबीआई ने अब तक इस मामले में 54 स्थानों पर छापेमारी की है। जांच के दौरान करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना समेत अन्य आपत्तिजनक साक्ष्य जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले दो चार्जशीट में बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, निजी व्यक्तियों और कंपनियों को आरोपी बनाया जा चुका है। यह मामला हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से सीबीआई को सौंपा गया था। राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने इसकी जांच अपने हाथ में ली थी।
चंडीगढ़ के दो मामले भी इसी जांच के दायरे में
सीबीआई ने चंडीगढ़ से जुड़े दो अन्य मामलों की जांच भी अपने हाथ में ली है। इनमें एक मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम चंडीगढ़ तथा दूसरा क्रेस्ट से संबंधित है। दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। सीबीआई के मुताबिक तीनों मामलों में जांच जारी है। एजेंसी अन्य संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल करने के साथ सरकारी धन के पूरे ट्रेल और कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल किए गए धन का पता लगाने में जुटी है।

