Haryana Politics : खाद की कीमतों पर भूपेंद्र हुड्डा का हमला, बोले- बढ़ती लागत ने तोड़ी किसानों की कमर
यूरिया, एसएसपी और एनपीके के दाम बढ़ने पर सरकार को घेरा
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उर्वरकों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को किसानों पर दोहरी मार बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक तरफ खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और दूसरी तरफ किसानों की आमदनी उस अनुपात में नहीं बढ़ रही। हुड्डा ने कहा कि यूरिया एसएसपी के दामों में करीब 200 रुपये और एनपीके उर्वरक के दामों में 200 से 550 रुपये तक की बढ़ोतरी ने किसानों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से महंगे डीजल, पेट्रोल और कृषि उपकरणों के बीच खाद की कीमतें बढ़ाना किसानों के लिए बड़ा झटका है। हुड्डा ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के दावे किए गए थे, लेकिन वास्तविकता इसके उलट दिखाई देती है। उनके अनुसार खेती में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर जरूरी वस्तु की कीमत बढ़ी है, जबकि फसलों के एमएसपी में हुई बढ़ोतरी महंगाई की गति का मुकाबला नहीं कर पा रही। उन्होंने दावा किया कि बीते वर्षों में किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बजाय और चुनौतीपूर्ण हुई है।
महंगाई के कई मोर्चे गिनाए
नेता प्रतिपक्ष ने केवल खाद ही नहीं, बल्कि घरेलू गैस, कमर्शियल सिलेंडर, डीजल-पेट्रोल और परिवहन लागत में हुई बढ़ोतरी को भी आम जनता और किसानों पर अतिरिक्त बोझ बताया। उन्होंने कहा कि खेती की लागत बढ़ने का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों की कीमतों के जरिए आम उपभोक्ता तक भी पहुंचता है।
तेल कीमतों पर भी उठाए सवाल
हुड्डा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद उपभोक्ताओं को उसका लाभ नहीं मिल रहा। उनका आरोप है कि सरकार बढ़ती महंगाई के दौर में भी जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने खाद और ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि खेती को लाभकारी बनाए बिना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से किसानों को राहत देने और बढ़ती लागत पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
