Haryana Operation Voter List : हरियाणा भाजपा का ‘ऑपरेशन वोटर लिस्ट’ स्टार्ट, अब मंच कम मैदान ज्यादा फार्मूले पर होगा काम
सीएम सैनी का विधायकों को टॉस्क; भाजपा विधायकों को मिला 30 दिन का ग्राउंड असाइनमेंट, 30 दिन हलकों में रहो, वोटर लिस्ट की हर एंट्री पर रखो नजर
Haryana Operation Voter List : हरियाणा भाजपा ने चुनावी तैयारी का बिगुल समय से बहुत पहले ही फूंक दिया है। पंचकूला स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय ‘पंचकमल’ में सोमवार को चली घंटों लंबी मैराथन बैठकों में संगठन और सरकार दोनों ने नेताओं को साफ संकेत दे दिए कि अब राजनीति केवल मंचों और सोशल मीडिया से नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट और बूथ मैनेजमेंट से तय होगी। बैठक का सबसे बड़ा संदेश था – ‘हर वोट की निगरानी, हर बूथ पर पकड़।‘ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पार्टी विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 15 जून से 15 जुलाई तक वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पूरी तरह सक्रिय रहें और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को मिशन मोड में लें।
पार्टी ने संकेत दे दिए कि आने वाले दिनों में भाजपा की सबसे बड़ी ताकत बूथ स्तर की पकड़ और वोटर लिस्ट की मजबूती होगी। बैठकों में संगठन और सरकार दोनों ने नेताओं को दो-टूक कहा कि अब केवल राजनीतिक बयानबाजी या बड़े कार्यक्रमों से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर विधानसभा क्षेत्र में ‘माइक्रो पॉलिटिकल मैनेजमेंट’ पर फोकस करना होगा। मुख्यमंत्री ने नेताओं को यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसी पात्र मतदाता का वोट कटना नहीं चाहिए और कोई गलत नाम सूची में शामिल नहीं होना चाहिए। दरअसल, भाजपा इस बार चुनावी तैयारी को बूथ और वोटर स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि तेजी से बदलते शहरी और ग्रामीण समीकरणों के बीच वोटर लिस्ट का सही और अपडेट रहना आने वाले चुनावों में निर्णायक साबित हो सकता है। यही वजह रही कि बैठक का सबसे बड़ा फोकस मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान पर दिखाई दिया।
भाजपा ने नेताओं को दिया माइक्रो-मैनेजमेंट का मंत्र
बैठक में चुनाव आयोग द्वारा अगले महीने शुरू होने वाले मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई गई। नेताओं से कहा गया कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे और कोई फर्जी वोट शामिल न हो। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अभियान है। भाजपा अब बूथ स्तर तक अपनी सक्रियता बढ़ाकर चुनावी जमीन को पहले से ज्यादा मजबूत करने की तैयारी में है। कार्यकर्ताओं को भी चुनाव आयोग के साथ समन्वय बनाकर काम करने और लोगों को वोटर लिस्ट से जुड़ी प्रक्रिया के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली-चंडीगढ़ की बजाय हलकों में रहने के निर्देश
बैठक का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि पार्टी ने केवल मौजूदा विधायकों और सांसदों तक खुद को सीमित नहीं रखा। पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों, चुनाव लड़ चुके नेताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी सक्रिय भूमिका सौंपने का फैसला हुआ। दरअसल भाजपा संगठन अब चुनाव से पहले ‘ग्राउंड एक्टिवेशन मॉडल’ पर काम करता दिख रहा है। पार्टी चाहती है कि हर नेता अपने क्षेत्र में लगातार मौजूद रहे, कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहे और स्थानीय स्तर पर संगठन की पकड़ मजबूत करे। माना जा रहा है कि भाजपा इस बार चुनावी तैयारी को केवल बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि ‘वोटर टू वोटर कनेक्ट’ पर फोकस कर रही है।
संगठन से सरकार तक, सबको मिला अलग-अलग जिम्मा
प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली की अध्यक्षता में हुई बैठक में राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़, प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, सह-प्रभारी सुरेंद्र नागर और संगठन मंत्री फणीन्द्र नाथ शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में नेताओं को यह भी कहा गया कि वे सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को बूथ स्तर तक पहुंचाएं और विपक्ष के आरोपों का जवाब तथ्यों के साथ दें। भाजपा का जोर इस बात पर रहा कि संगठन और सरकार दोनों की गतिविधियां जमीनी स्तर पर दिखाई दें।
भाजपा क्यों मान रही एसआईआर को ‘गेम चेंजर’
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि तेजी से बदलते शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मतदाता सूची का सही और अपडेट रहना बेहद अहम है। नए वोटर जोड़ना, स्थानांतरित मतदाताओं के रिकॉर्ड अपडेट करना और गलत एंट्रियों को हटाना सीधे चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता है। यही वजह है कि पार्टी ने एसआईआर अभियान को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना दिया है। स्पष्ट है कि हरियाणा भाजपा अब चुनाव नजदीक आने का इंतजार करने के बजाय पहले ही संगठन को एक्टिव मोड में ले आई है। पंचकमल की बैठक से यह संकेत मिले कि इस बार लड़ाई केवल नारों की नहीं, बल्कि बूथ और वोटर डेटा की होगी।
