Haryana News : विधानसभा तक पहुंचा 1400 अनुबंधित विश्वविद्यालय शिक्षकों की नौकरी का मामला, मानसून सत्र में बिल की उम्मीद
5 से 15 साल से पढ़ा रहे शिक्षक, नियमित भर्ती में उम्र सीमा पार करने का भी संकट; 2024 से सरकार के स्तर पर चल रही है सेवा-सुरक्षा विधेयक की प्रक्रिया
Haryana News : हरियाणा के राजकीय विश्वविद्यालयों में वर्षों से अनुबंध पर पढ़ा रहे करीब 1,400 असिस्टेंट प्रोफेसरों और लेक्चरर्स की नौकरी अब विधानसभा के मानसून सत्र के एजेंडे तक पहुंच गई है। हरियाणा विश्वविद्यालय अनुबंधित शिक्षक संघ (हुकटा) ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर मांग की है कि ‘हरियाणा राज्य विश्वविद्यालय अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर/लेक्चरर्स (सेवा सुरक्षा) बिल, 2026’ को इसी सत्र में विधानसभा में लाकर कानून का रूप दिया जाए। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिया कि अधिकारियों को जॉब सिक्योरिटी की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान इस बिल को लेकर सरकार की अगली कार्रवाई पर करीब 1,400 शिक्षकों की नजर है।
दो साल से सरकारी प्रक्रिया में अटका है मामला
हुकटा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. विजय मलिक के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष दावा किया कि विधेयक की प्रक्रिया शीतकालीन सत्र 2024 के बाद से सरकारी स्तर पर चल रही है। उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों से अनुबंधित शिक्षकों से संबंधित जरूरी जानकारी और प्रस्ताव पर अवलोकन लिया गया। इसके बाद विधेयक को मुख्य सचिव कार्यालय की मानव संसाधन शाखा में अनुमोदन और आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया। शिक्षकों का कहना है कि अब प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक औपचारिकताओं को तेजी से पूरा कर विधेयक को विधानसभा में पेश करने की जरूरत है। उनका तर्क है कि सत्र समाप्त होने के बाद मामला फिर अगले विधायी अवसर तक खिंच सकता है।
5-15 साल की सेवा, फिर भी हर भर्ती में नौकरी का खतरा
हुकटा के मुताबिक राजकीय विश्वविद्यालयों में इन शिक्षकों की नियुक्तियां यूजीसी नेट, पीएचडी जैसी निर्धारित योग्यताओं, विधिवत विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के आधार पर हुई हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है जो पिछले 5 से 15 वर्षों से लगातार पूर्ण कार्यभार के साथ पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद जब विश्वविद्यालयों में नियमित पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है तो अनुबंधित शिक्षकों की सेवाएं समाप्त होने का खतरा पैदा हो जाता है। संगठन का कहना है कि इससे लंबे समय से पढ़ा रहे अनुभवी शिक्षकों के सामने हर बार रोजगार का संकट खड़ा हो जाता है।
कई शिक्षक अब उम्र सीमा के मुहाने पर
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इन शिक्षकों की उम्र है। संगठन के अनुसार वर्षों से अनुबंध पर काम कर रहे कई शिक्षक अब नियमित सरकारी भर्ती में आवेदन करने की निर्धारित आयु सीमा के करीब पहुंच चुके हैं या उसे पार कर चुके हैं। ऐसे में उनका तर्क है कि यदि वर्षों के अनुभव के बाद भी अनुबंध खत्म हो जाता है और वे उम्र सीमा के कारण नई भर्ती में शामिल नहीं हो पाते, तो उनके लिए रोजगार का विकल्प लगभग समाप्त हो सकता है। इसी आधार पर संगठन सेवा की निरंतरता और रोजगार सुरक्षा की मांग कर रहा है।
स्कूल-कॉलेज के बाद विश्वविद्यालय शिक्षकों को भी सुरक्षा की मांग
हुकटा का कहना है कि सरकार पहले ही स्कूल और कॉलेज स्तर पर काम कर रहे अनुबंधित शिक्षकों को सेवा-सुरक्षा दे चुकी है। इसलिए राजकीय विश्वविद्यालयों में समान परिस्थितियों में वर्षों से काम कर रहे अनुबंधित शिक्षकों के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि उसकी मांग नियमित भर्ती रोकने की नहीं है। पहले लंबे समय से काम कर रहे योग्य शिक्षकों का रोजगार सुरक्षित किया जाए और उसके बाद नियमित भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
57,700 रुपये से शुरू वेतन, सालाना बढ़ोतरी नहीं
शिक्षकों ने आर्थिक पक्ष भी मुख्यमंत्री के सामने रखा। हुकटा के अनुसार अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर पिछले कई वर्षों से 57,700 रुपये के प्रारंभिक वेतन पर काम कर रहे हैं और इस अवधि में उनके नियमित वार्षिक वेतन में कोई वृद्धि नहीं हुई है। संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच एक ही शुरुआती वेतन पर वर्षों तक काम करना शिक्षकों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। इसलिए प्रस्तावित सेवा-सुरक्षा के साथ उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत है।
60 साल तक रोजगार सुरक्षा की मांग
प्रस्तावित विधेयक को एक्ट का रूप मिलने पर संगठन की मुख्य मांग 60 वर्ष की आयु तक रोजगार सुरक्षा की है। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक विश्वविद्यालयों में नियमित कार्यभार संभालते हुए सेवाएं दी हैं, इसलिए उनके अनुभव और सेवा अवधि को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में डॉ. विजय मलिक के अलावा डॉ. सुमन, डॉ. अंजू बाला और डॉ. अमित मलिक शामिल रहे।
अब गेंद सरकार के पाले में
मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री स्तर पर मामला पहुंचने के बाद अब असली सवाल यह है कि क्या सरकार प्रशासनिक और वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर इस विधेयक को इसी सत्र में सदन के पटल पर लाती है। यदि बिल विधानसभा में आता है तो प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों में लंबे समय से अनुबंध पर काम कर रहे करीब 1,400 शिक्षकों के लिए यह केवल नौकरी का मुद्दा नहीं होगा, बल्कि वर्षों से चली आ रही रोजगार की अनिश्चितता खत्म करने की दिशा में बड़ा फैसला होगा। हुकटा ने रक्षाबंधन को विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक बताते हुए सरकार से इस अवसर पर शिक्षकों को रोजगार सुरक्षा देने की मांग की है। अब शिक्षकों की नजर मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई और विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी है।

