Haryana News : हरियाणा शिक्षा विभाग सख्त, मृत शिक्षकों के लोन मामलों में अब नहीं चलेगी लापरवाही
ऋण माफी से पहले होगी बैंक और रिकॉर्ड की डबल वेरिफिकेशन
Haryana News : हरियाणा में मृत शिक्षकों के ऋण माफी मामलों में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और देरी पर अब शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि भविष्य में किसी भी मृत शिक्षक के लोन माफी मामले को बिना पूरी जांच और सत्यापन के निदेशालय न भेजा जाए। विभाग का मानना है कि कई मामलों में जिला कार्यालयों से अधूरी या गलत जानकारी भेजे जाने के कारण न केवल मामलों के निपटान में अनावश्यक देरी होती है, बल्कि सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ता है। यही वजह है कि अब पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं।
बैंक से भी होगी लोन की पुष्टि
विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, सहायक निदेशक (ऑडिट एवं लेखा शाखा) ने निर्देश दिए हैं कि मृत कर्मचारी के ऋण की राशि को माफ करने से पहले संबंधित कार्यालय का अनुभाग अधिकारी पूरी रकम का सत्यापन करेगा। अगर शिक्षक ने पंजाब नेशनल बैंक से ऋण लिया है, तो उसकी बकाया राशि और ब्याज की गणना बैंक से भी अनिवार्य रूप से सत्यापित करानी होगी। विभाग ने साफ किया है कि बिना बैंक पुष्टि के कोई भी मामला आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
डीडीओ को देनी होगी पूरी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) को यह स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा कि मृतक कर्मचारी ने कुल कितना ऋण लिया था और वर्तमान में कितनी राशि बकाया है। साथ ही, मूल ऋण राशि और उस पर लगने वाले ब्याज की पूरी गणना तय प्रारूप में निदेशालय भेजनी होगी। विभाग का कहना है कि इससे मामलों का तेजी से निपटान होगा और भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना भी कम होगी।
लापरवाही पर होगी जवाबदेही तय
शिक्षा विभाग ने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी मामले में गलत जानकारी, देरी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे। विभाग के इस कदम को मृत कर्मचारियों के लंबित मामलों को तेजी से निपटाने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
