Haryana News : पैक्स का घाटा खत्म करने की कवायद, मुनाफे में होंगी मार्च तक 100 और समितियां
33 से बढ़कर 51 हुईं लाभ वाली पैक्स, अब संख्या 151 करने का लक्ष्य
Haryana News : हरियाणा में लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रही प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों यानी पैक्स को अब कमाई के केंद्र बनाने की तैयारी है। सरकार ने अगले करीब सात महीनों में 100 और पैक्स को मुनाफे में लाने का लक्ष्य तय किया है। अभी 51 पैक्स लाभ में हैं, जबकि कुछ समय पहले यह संख्या केवल 33 थी। सरकार ने इसके लिए प्रत्येक पैक्स की वित्तीय स्थिति के हिसाब से रोडमैप तैयार किया है और 31 मार्च, 2027 की समय-सीमा तय की है।
यह बदलाव केवल पैक्स के खातों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार इन्हें गांवों में बैंकिंग और कृषि गतिविधियों के साथ-साथ सरकारी डिजिटल सेवाओं के केंद्र के रूप में भी इस्तेमाल कर रही है। यही वजह है कि सीएससी के तौर पर काम करने वाली पैक्स की संख्या पिछले कुछ समय में 410 से बढ़कर 515 हो गई है। पैक्स के कामकाज को ऑनलाइन करने का पहला बड़ा चरण पूरा हो चुका है।
बृहस्पतिवार को यहां मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में इस संदर्भ में विस्तार से चर्चा हुई और पूरी रणनीति तय की गई। बैठक में बताया गया कि पहले चरण में शामिल सभी 710 पैक्स 7 अगस्त तक ई-पैक्स प्रणाली पर आ चुकी थीं। इनमें 708 का ऑनलाइन ऑडिट भी पूरा हो गया है। यानी अब सरकार के पास इन समितियों की वित्तीय स्थिति और कामकाज का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध है। इसी आधार पर कमजोर पैक्स की पहचान कर उन्हें मुनाफे में लाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
गांव में सरकारी सेवाओं का नया ठिकाना बन रहीं पैक्स
सीएससी बनने के बाद पैक्स की भूमिका कृषि ऋण और खाद-बीज तक सीमित नहीं रह गई है। ग्रामीण लोगों को विभिन्न डिजिटल नागरिक सेवाएं इन्हीं केंद्रों से उपलब्ध कराने का दायरा बढ़ाया जा रहा है। पैक्स के जरिए जन औषधि केंद्र खोलने की योजना भी इसी विस्तार का हिस्सा है। सरकार ने पहले से जन औषधि केंद्र चला रही पैक्स की दिक्कतों को दूर करने के लिए अलग से बैठक करने के निर्देश दिए हैं।
सहकारी ढांचे से भंडारण बढ़ाने की तैयारी
सरकार अब सहकारी नेटवर्क का इस्तेमाल अनाज भंडारण बढ़ाने के लिए भी करेगी। इसके लिए राज्य में 55 स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां करीब 3.06 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम विकसित किए जाने हैं। इसका सीधा फायदा कृषि उपज के स्थानीय भंडारण ढांचे को मिलेगा और सहकारी संस्थाओं की गतिविधियों का दायरा भी बढ़ेगा।
रोहतक में सहकारी शिक्षा का नया संस्थान
सहकारिता विभाग अपने मानव संसाधन को मजबूत करने के लिए रोहतक के सेंटर ऑफ कोऑपरेटिव मैनेजमेंट को नए रूप में विकसित कर रहा है। बजट घोषणा के अनुसार इसे सहकारी महाविद्यालय बनाया जाना है। आगे इसे त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से जोड़कर शिक्षा, प्रशिक्षण और सहकारिता क्षेत्र में शोध का केंद्र बनाने की योजना है।
पहली बार व्यापक सहकारिता नीति का खाका
राज्य में सहकारिता के लिए अलग व्यापक नीति भी तैयार की जा रही है। इसके लिए गठित समिति विभिन्न संस्थानों और हितधारकों से सुझाव ले चुकी है और नीति का प्रारूप प्रशासनिक मंजूरी के स्तर पर है। इसके जरिए पैक्स के साथ हरको बैंक, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों, बीमा और उर्वरक कारोबार को एक व्यापक ढांचे में लाने की कोशिश होगी।
आलू के लिए 50 एकड़ में टिश्यू कल्चर सुविधा
इस बीच केंद्र ने हरियाणा में आलू टिश्यू कल्चर सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए करीब 50 एकड़ जमीन तलाशने पर सहमति बनी है। सुविधा बनने के बाद किसानों को रोगमुक्त और बेहतर गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री स्थानीय स्तर पर मिलने की उम्मीद है। इससे आलू की उत्पादकता बढ़ाने के साथ रोजगार और कृषि आधारित कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

