Haryana News: धान खरीद से पहले ही चढ़ूनी ने सरकार को चेताया, 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग
6.69 लाख टन सीएमआर डिलीवरी लंबित होने की खबरों के बीच बोले-शैलर पीछे हटे तो किसानों की फसल कौन खरीदेगा?
Haryana News: धान की सरकारी खरीद का सीजन शुरू होने से पहले ही किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने हरियाणा सरकार को व्यवस्था को लेकर घेर लिया है। उन्होंने 15 सितंबर से 2026-27 की धान खरीद शुरू करने की मांग करते हुए कहा है कि तारीख घोषित करने भर से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को खरीद शुरू होने से पहले ही भुगतान, उठान, भंडारण और शैलर की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
चढूनी ने खास तौर पर पिछले खरीद सीजन की करीब 6.69 लाख टन सीएमआर डिलीवरी लंबित होने की खबरों को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। उनका कहना है कि अगर पिछले साल की लंबित डिलीवरी का असर नए सीजन की खरीद पर पड़ता है और शैलर धान लेने से पीछे हटते हैं या हड़ताल जैसी स्थिति बनती है तो सरकार के पास किसानों की फसल खरीदने और मंडियों से उठाने की वैकल्पिक व्यवस्था क्या है, यह पहले से साफ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी हालत में व्यवस्था की खामियों की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।
शैलर पीछे हटे तो सरकार के पास क्या प्लान-बी
चढूनी ने कहा कि अगर पिछले वर्ष की सीएमआर डिलीवरी अथवा किसी प्रशासनिक विवाद के कारण शैलर मालिकों के सामने परेशानी है तो उसका समाधान सरकार और संबंधित एजेंसियों को करना होगा। किसान को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि शैलर धान लेने में असमर्थ रहते हैं तो मंडियों में फसल का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में किसान को अपनी तैयार फसल निजी व्यापारियों को औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से कहा कि सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही प्लान-बी तैयार रखा जाए। जरूरत पड़ने पर सरकारी एजेंसियों के स्तर पर पर्याप्त भंडारण, अस्थायी भंडारण और उठान की व्यवस्था की जाए, ताकि मंडियों में फसल जमा न हो और किसान को अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार न करना पड़े।
6.69 लाख टन सीएमआर पर सरकार स्थिति साफ करे
चढूनी ने कहा कि मीडिया में सामने आ रही जानकारी के अनुसार 2025-26 की धान खरीद से संबंधित लगभग 6.69 लाख टन चावल की सीएमआर डिलीवरी लंबित बताई जा रही है। केंद्र की ओर से चावल जमा करवाने की समय-सीमा 30 सितंबर तक बढ़ाए जाने के बावजूद भारतीय खाद्य निगम द्वारा हरियाणा का निर्धारित 36 लाख टन खरीद लक्ष्य पूरा किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि पिछली खरीद का इतना बड़ा स्टॉक और सीएमआर डिलीवरी का मामला अभी पूरी तरह निपटा नहीं है तो नए सीजन में शैलर व्यवस्था और सरकारी खरीद पर इसका क्या असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि धान खरीद शुरू होने से पहले इस स्थिति पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी दी जाए।
‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ के आंकड़ों ने भी खड़े किए सवाल
चढूनी ने पिछले सीजन की खरीद व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 4,83,897 किसानों ने 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान का रकबा दर्ज कराया, जबकि कृषि विभाग की ओर से 30,16,285 एकड़ रकबा वैरिफाई किया गया। यानी दर्ज और वैरिफाइड रकबे में करीब 1,36,116 एकड़ का अंतर सामने आता है। चढूनी ने इसे महज आंकड़ों का अंतर मानने के बजाय गंभीर प्रशासनिक सवाल बताया है। उन्होंने सरकार से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि दोनों आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर क्यों रहा और इसका सरकारी खरीद पर क्या प्रभाव पड़ा।
बायोमेट्रिक से बदलेगी मंडी की पुरानी व्यवस्था
धान खरीद में लागू की जा रही बायोमेट्रिक व्यवस्था पर भी चढूनी ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मंडियों में किसान की फसल पहुंचने के बाद उसे सुखाने, सुरक्षित रखने और शैलर तक पहुंचाने की प्रक्रिया में आढ़ती की भूमिका रही है। सरकारी खरीद शुरू होने के बाद नियमानुसार खरीद दर्ज होती है। अब बायोमेट्रिक व्यवस्था के कारण इस पूरी प्रक्रिया में व्यावहारिक दिक्कतें आने की आशंका है। ऐसे में चढूनी का तर्क है कि 15 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू कर देने से किसान की तैयार फसल और सरकारी खरीद प्रक्रिया के बीच पैदा होने वाला अंतर कम किया जा सकता है। उनका कहना है कि किसान मंडी में फसल लेकर पहुंचे और उसे सरकारी खरीद शुरू होने के इंतजार में लंबे समय तक रोकना पड़े, ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए।
किसान ने रिकॉर्ड नहीं बनाया, फिर सजा क्यों
चढूनी ने पिछले साल की खरीद व्यवस्था में किसी भी संभावित गड़बड़ी की जिम्मेदारी किसानों पर डालने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसानों ने न तो खरीद व्यवस्था बनाई थी और न ही सरकारी रिकॉर्ड तैयार किया था। इसलिए व्यवस्था की किसी भी कमी या गड़बड़ी की सजा किसान को देना पूरी तरह अनुचित होगा। उन्होंने कहा कि अगर पिछले साल खरीद व्यवस्था में अनियमितता, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और वास्तविक दोषियों की तय होनी चाहिए।
हर मंडी के लिए पहले से तैयार हो एक्शन प्लान
चढूनी ने सरकार से मांग की कि खरीद सीजन शुरू होने से पहले सभी खरीद एजेंसियों, मंडी अधिकारियों, आढ़तियों और शैलर व्यवस्था की समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मंडी के लिए पहले से स्पष्ट कार्ययोजना तैयार होनी चाहिए। कितनी फसल आएगी, कौन खरीदेगा, कहां भंडारण होगा, उठान कितनी तेजी से होगा और किसान को भुगतान कितने समय में मिलेगा। उन्होंने कहा कि धान किसान की तैयार फसल है और सरकार की जिम्मेदारी है कि किसान को अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर न भटकना पड़े। चढूनी ने दोहराया कि 15 सितंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा की जाए और खरीद, भुगतान, भंडारण तथा उठान की व्यवस्था पहले से लिखित रूप में सुनिश्चित की जाए।

