Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

Haryana News : हीमोफिलिया के इलाज का सालाना बिल 50 करोड़, अब कॉरपोरेट से मदद मांगेगी सरकार

23 जिला अस्पतालों के उपकरण भी सीएसआर से जुटेंगे, करीब 1000 मरीजों को मिलेगा सहारा

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

Haryana Health News : हरियाणा में करीब 1000 हीमोफिलिया मरीजों के इलाज पर सालाना 50 करोड़ रुपये तक का खर्च आ रहा है। जीवनभर इलाज और नियमित दवा की जरूरत वाले इन मरीजों के लिए सरकार अब कॉरपोरेट सेक्टर की मदद जुटाएगी। साथ ही प्रदेश के 23 जिला सिविल अस्पतालों में जरूरी बायोमेडिकल उपकरण भी सीएसआर के जरिए लगाए जाएंगे।

इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन को बैंक, पीएसयू, उद्योग और कॉरपोरेट घरानों को अभियान से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ़ सुमिता मिश्रा ने सभी उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में संभावित सीएसआर भागीदारों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। जिला अस्पतालों की जरूरत का आकलन पहले ही किया जा चुका है और उसी आधार पर जरूरी उपकरणों की सूची तैयार की गई है।

Advertisement

सरकार ने सीएसआर के लिए दो प्रमुख क्षेत्र तय किए हैं। कंपनियां चाहें तो किसी जिला अस्पताल के लिए सरकार द्वारा चिन्हित बायोमेडिकल उपकरण प्रायोजित कर सकती हैं या फिर हीमोफिलिया मरीजों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता दे सकती हैं। उपकरण मिलने से जिला अस्पतालों में जांच और उपचार की क्षमता बढ़ेगी। इससे मरीजों को छोटी-छोटी जांच या इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजने की जरूरत कम होगी और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का दबाव भी घटेगा।

Advertisement

4-5 लाख रुपये सालाना पड़ता है एक मरीज का इलाज

हीमोफिलिया मरीजों को लगातार और समय पर उपचार की जरूरत होती है। विभाग के मुताबिक प्रदेश में करीब 1000 मरीज पंजीकृत हैं और इनके इलाज पर सालाना खर्च लगभग 50 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। यानी औसतन एक मरीज पर 4 से 5 लाख रुपये सालाना खर्च आता है। डॉ़ सुमिता मिश्रा के अनुसार इलाज में निरंतरता टूटने पर मरीजों में जटिलताओं और विकलांगता का खतरा बढ़ सकता है। समय पर उपचार न मिलने से उनकी उत्पादकता भी प्रभावित होती है। ऐसे में सीएसआर से मिलने वाली मदद को मरीजों की नियमित देखभाल बनाए रखने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कंपनियां पैसा देंगी, सरकारी एजेंसी खरीदेगी उपकरण

सीएसआर राशि के इस्तेमाल को लेकर सरकार ने खरीद व्यवस्था भी तय की है। बायोमेडिकल उपकरणों के लिए सीएसआर फंड सीधे हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचएमएससीएल) को दिया जा सकेगा। यह राज्य की अधिकृत चिकित्सा खरीद एजेंसी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निजी संस्थाओं से मिली राशि की खरीद को सरकारी संस्थागत प्रक्रिया के तहत रखना है, ताकि उपकरणों की गुणवत्ता, खरीद में पारदर्शिता और जिला अस्पतालों तक उनकी आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

डीसी खोजेंगे कंपनियां, स्वास्थ्य विभाग देखेगा काम

उपायुक्तों को सिविल सर्जन और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर संभावित सीएसआर भागीदारों की पहचान करनी होगी। वे कंपनियों और संस्थाओं के सामने जिले की जरूरत के मुताबिक प्रस्ताव रखेंगे और उनकी प्रतिबद्धताओं की निगरानी करेंगे। हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो स्वास्थ्य विभाग, एचएमएससीएल और सीएसआर भागीदारों के बीच समन्वय करेगा। जिला प्रशासन को संपर्क किए गए संगठनों, मिली प्रतिबद्धताओं और प्रस्तावों की प्रगति की रिपोर्ट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को देनी होगी।

Advertisement
×