Haryana News : सोहना बिजली दफ्तर में फर्जी सर्टिफिकेट का बड़ा खेल! 87 कर्मचारियों की जांच के बाद FIR की तैयारी
डीएचबीवीएन ने गठित कमेटी को सौंपी शिकायत, 50 प्रतिशत से अधिक के सर्टिफिकेट फर्जी; जांच रिपोर्ट में कई दस्तावेज संदिग्ध बताए गए, मूल प्रमाणपत्र नहीं मिलने का दावा
Haryana News : दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के सोहना डिवीजन में कार्यरत कर्मचारियों की नियुक्तियों और शैक्षणिक दस्तावेजों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। विभाग ने शिकायत और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले को आगे बढ़ाते हुए संबंधित कमेटी को जांच सौंप दी है तथा आपराधिक एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश की है।
मामला हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के तहत कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक और तकनीकी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की। शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर जांच कराई गई और अब पूरे मामले को आगे की कार्रवाई के लिए रेफर किया गया है।
87 कर्मचारियों के दस्तावेज जांच के दायरे में
शिकायत के बाद तैयार जांच रिपोर्ट में कुल 87 कर्मचारियों के दस्तावेजों की पड़ताल की गई। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में कर्मचारियों के मूल प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। कई मामलों में संबंधित कर्मचारियों को नोटिस देने के बावजूद दस्तावेज जमा नहीं होने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया कि संबंधित शिक्षा बोर्डों और संस्थानों से सत्यापन के लिए संपर्क किया गया, जहां मूल प्रमाणपत्रों के बिना अंतिम पुष्टि संभव नहीं बताई गई।
जांच में करीब आधे दस्तावेजों पर संदेह
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार जांच के दौरान लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारियों के दस्तावेज संदिग्ध अथवा अप्रमाणित पाए जाने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ मामलों में जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं मिला, जिससे सत्यापन प्रभावित हुआ। हालांकि अंतिम निष्कर्ष के लिए विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया बाकी है।
कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था और सत्यापन प्रक्रिया भी सवालों में
जांच रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि कर्मचारियों की नियुक्ति पूर्व में ठेकेदारों के माध्यम से हुई थी और योग्यता सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में यह संभावना भी दर्ज की गई कि मामले में केवल कर्मचारी ही नहीं बल्कि प्रक्रिया से जुड़े स्तरों की भी जांच की जरूरत हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इसी तरह की शिकायतें दूसरे सर्किलों तक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एफआईआर और विस्तृत जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने, जिम्मेदार कर्मचारियों, अधिकारियों और संबंधित पक्षों पर आपराधिक केस दर्ज करने तथा कथित रूप से प्राप्त लाभों की समीक्षा की मांग की है। डीएचबीवीएन मुख्यालय ने भी मामले को गंभीर मानते हुए गठित कमेटी को शिकायत भेजी है और तय समय में तथ्यात्मक रिपोर्ट देने को कहा है। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और सत्यापन के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी। फिलहाल मामला जांच चरण में है। विभागीय स्तर पर अंतिम निष्कर्ष और किसी भी आपराधिक कार्रवाई का फैसला कमेटी की रिपोर्ट, दस्तावेज सत्यापन और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
