Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

Haryana: करनाल में छात्र पर शारीरिक दंड के बाद मानवाधिकार आयोग सख्त, व्यापक ऑडिट के आदेश

Haryana News: बच्चों की गरिमा पर हमले को आयोग ने माना कानून का घोर उल्लंघन

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

Haryana News:  करनाल स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में कक्षा सातवीं के एक नाबालिग छात्र को कथित रूप से शिक्षक द्वारा थप्पड़ मारे जाने की घटना ने हरियाणा मानव अधिकार आयोग को झकझोर दिया है। आयोग ने इस कृत्य को स्कूल परिसर में बच्चों की गरिमा व मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा आक्रमण बताते हुए इसे बच्चों के वैधानिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार दिया।

शिकायत के अनुसार, छात्र को एक साधारण गलती पर अन्य विद्यार्थियों के सामने बार-बार थप्पड़ मारे गए। घटना से उत्पन्न अपमान, भय और मानसिक आघात को आयोग ने विशेष रूप से गंभीर माना। मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) ललित बत्रा ने स्पष्ट कहा कि स्कूलों में ऐसी घटनाएं बच्चों में दीर्घकालिक भावनात्मक असुरक्षा पैदा करती हैं, जो किसी भी सिविलाइज्ड स्पेस (सभ्य वातावरण) का संकेत नहीं है।

Advertisement

कानून की कसौटी पर घटना स्पष्ट अपराध

अपने विस्तृत आदेश में आयोग ने मामले को किशोर न्याय अधिनियम (2015) की धारा 75 व 82 तथा आरटीई अधिनियम (2009) की धारा 17 का सीधा उल्लंघन बताया है। इन प्रावधानों में बच्चों पर किसी भी प्रकार की शारीरिक सजा या मानसिक यातना को पूर्णत: निषिद्ध किया गया है। जस्टिस बत्रा ने कहा कि अनुशासन का नाम लेकर हिंसा लागू नहीं की जा सकती, और ऐसा कोई भी व्यवहार कानूनन दंडनीय है।

Advertisement

जांच नहीं, यह जवाबदेही का समय : आयोग

आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी करनाल को निर्देश दिया है कि वे जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के साथ मिलकर डीपीएस की पूरी संचालन प्रणाली का विस्तृत ऑडिट कराएं। जांच में जिन बिंदुओं की समीक्षा होगी, उनके बारे में भी स्पष्ट किया गया है। ऑडिट में यह तय होगा कि शारीरिक दंड पर प्रतिबंध वाले कानूनों का वास्तविक अनुपालन हो। स्कूल की अनुशासनात्मक नीति व सुरक्षा उपायों की समीक्षा होगी। पूर्व शिकायतों या घटनाओं का रिकॉर्ड भी अगर हुआ तो वह दर्ज होगा।

प्राचार्य को भी किया गया तलब

आयोग ने डीपीएस करनाल के प्राचार्य से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें घटना के तथ्य, संबंधित शिक्षक पर की गई कार्रवाई, भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के उपाय तथा प्रभावित बच्चे के खिलाफ किसी भेदभाव की आशंका से इंकार का स्पष्ट आश्वासन शामिल होगा। आयोग ने अपने आदेशें में कहा है कि इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जिन संस्थानों का उद्देश्य बच्चों का भविष्य संवारना है, क्या वे वास्तव में छात्रों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध करवा रहे हैं।

Advertisement
×