Haryana Employees : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हरकत में सरकार, कच्चे कर्मियों के नियमितीकरण का रास्ता खुला
2014 की वैध नीतियों के तहत पात्र कर्मचारियों की पहचान कर नियमित करने के आदेश, 7 जुलाई 2014 की नीति से पहले पक्के हुए कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित
Haryana Employees : सालों से नियमितीकरण की उम्मीद लगाए बैठे हरियाणा के कच्चे और अनुबंधित कर्मचारियों के मामलों में अब फिर से हलचल शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा सरकार ने 2014 की वैध नियमितीकरण नीतियों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने प्रदेश के सभी विभागों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि पात्र कर्मचारियों की पहचान की जाए, उनके मामलों की निर्धारित शर्तों के आधार पर जांच हो और पात्र पाए जाने पर नियमितीकरण के आदेश जारी किए जाएं।
मंगलवार को मुख्य सचिव की ओर से इस संदर्भ में लिखित में आदेश जारी किए गए। इस आदेश की खास बात यह है कि मामला केवल नौकरी पक्की करने तक सीमित नहीं रहेगा। पात्र पाए जाने वाले कर्मचारियों को पात्रता की तारीख से पदोन्नति समेत अन्य परिणामी सेवा लाभ भी दिए जाएंगे। यानी नियमितीकरण का असर उनकी आगे की सेवा पर ही नहीं, बल्कि पात्रता की तारीख से जुड़े सेवा लाभों पर भी पड़ेगा। प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को ये आदेश भेजे हैं। उन्हें पात्र कर्मचारियों की पहचान और रिकॉर्ड की जांच कर पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने खोला रास्ता
सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल, 2026 के मदन सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा सरकार एवं अन्य मामले में दिए फैसले के अनुपालन में उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार की 16 जून, 2014 और 18 जून, 2014 की नियमितीकरण नीतियों को वैध माना था। वहीं, 7 जुलाई, 2014 की नियमितीकरण नीतियों को रद्द कर दिया था। यही फैसला अब राज्य सरकार के ताजा आदेश का आधार बना है। यानी जिन कर्मचारियों के मामले वैध नीतियों के दायरे में आते हैं, उनके लिए नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रशासनिक रास्ता साफ कर दिया गया है।
ग्रुप-बी के लिए ये शर्तें
पहली श्रेणी में ग्रुप-बी के वे कर्मचारी होंगे, जो 28 मई, 2014 तक सरकार द्वारा अनुमोदित एजेंसी के माध्यम से अनुबंध आधार पर काम कर रहे थे। नियमितीकरण के लिए उन्हें कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी। इसके अलावा वे स्वीकृत रिक्त पद पर कार्यरत हों, सेवा में बने हुए हों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करते हों।
ग्रुप-सी व डी के कर्मियों को भी लाभ
दूसरी श्रेणी में ग्रुप-सी और डी के कर्मचारी व वर्कर शामिल हैं। इनके लिए भी 28 मई 2014 तक कम से कम तीन वर्ष की अनुबंध सेवा, स्वीकृत रिक्त पद पर कार्यरत होना, सेवा में बने रहना और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता जैसी शर्तें लागू होंगी। सरकार ने एक तीसरी श्रेणी भी स्पष्ट की है, जो लंबे समय से लंबित मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। 18 जून, 2014 की नीति के तहत पात्र ग्रुप-सी और डी के एडहॉक, अनुबंध और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, जो पहले की नियमितीकरण नीतियों के बावजूद प्रशासनिक कारणों से नियमित नहीं हो सके थे, अब अपने मामलों की पात्रता के आधार पर लाभ पा सकेंगे।
पात्रता की तारीख से मिलेगा प्रमोशन का लाभ
इस पूरे आदेश का सबसे अहम पहलू परिणामी सेवा लाभ है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले कर्मचारियों को पात्रता की तारीख से पदोन्नति समेत अन्य परिणामी सेवा लाभ दिए जाएंगे। मतलब साफ है कि किसी कर्मचारी का मामला जांच में पात्र पाया जाता है तो उसे केवल आज से नियमित कर्मचारी मानकर आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, बल्कि नियमों के अनुसार उसकी पात्रता की तारीख से जुड़े सेवा लाभ भी निर्धारित किए जा सकेंगे। हालांकि इसके लिए सेवा रिकॉर्ड, पात्रता और संबंधित नियमों का सक्षम प्राधिकारी से सत्यापन जरूरी होगा।
तीन पुराने निर्देश लिए वापस
नियमितीकरण से संबंधित सरकार के 18 जून, 2020, 13 जून, 2024 और 17 दिसंबर, 2024 के निर्देश भी तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए गए हैं। अब विभागों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके अनुरूप जारी ताजा आदेश के आधार पर पात्र मामलों पर कार्रवाई करनी होगी।
7 जुलाई की नीति से पक्के हुए कर्मचारियों को राहत
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 जुलाई, 2014 की नियमितीकरण नीतियों को रद्द किए जाने का असर उन कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा, जो इन नीतियों के तहत पहले ही नियमित हो चुके हैं और फिलहाल सेवा में हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेवा समाप्त नहीं की जाएगी। हालांकि ऐसे कर्मचारियों को उनके पद के सबसे निचले वेतनमान में रखा जाएगा। वहीं, जो कर्मचारी इन नीतियों के तहत नियमित कर्मचारियों के समान स्थिति में हैं और वर्तमान में सेवा में हैं, वे भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सत्यापन के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप संबंधित राहत के हकदार होंगे।
अब गेंद विभागों के पाले में
सरकार के आदेश के बाद विभागों को पहले यह पता लगाना होगा कि कौन-कौन कर्मचारी 2014 की वैध नियमितीकरण नीतियों के दायरे में आते हैं। इसके बाद नियुक्ति की तारीख, सेवा अवधि, स्वीकृत पद, शैक्षणिक योग्यता और सेवा में बने रहने सहित सभी शर्तों का सत्यापन होगा। पात्र पाए जाने वाले कर्मचारियों के नियमितीकरण के आदेश जारी किए जाएंगे।

