हरियाणा में टली बिजली कर्मचारियों की 3 दिवसीय हड़ताल, अनिल विज की बैठक में बनी बात; स्मार्ट मीटर में प्रीपेड-पोस्टपेड विकल्प
जेई प्रमोशन कोटा 35 से 50 फीसदी करने, कैडर स्पेसिफिक एसीपी और मेडिकल कैशलेस सुविधा की मांग भी उठी
बिजली कर्मचारियों की 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल सोमवार को टल गई। ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ हुई बैठक में संयुक्त एक्शन कमेटी ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। कर्मचारियों की तीन प्रमुख आपत्तियां - एग्री डिस्कॉम का गठन, गुरुग्राम-नूंह में समानांतर निजी बिजली वितरण लाइसेंस और स्मार्ट मीटर बैठक के केंद्र में रहीं। विज की ओर से इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने और अन्य मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन वापस लिया।
बैठक में ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़, एचवीपीएनएल के प्रबंध निदेशक डॉ. आदित्य दहिया, उत्तर एवं दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कर्मचारी पक्ष से एएचपीसी वर्कर्स यूनियन के चेयरमैन देवेंद्र हुड्डा, हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बिजेंद्र बराड़, यशपाल देशपाल, राजेंद्र राणा और रविंद्र धनखड़ तथा एचएसईवी डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अभिमन्यु धनखड़, महासचिव विपिन भारद्वाज, कृष्णपाल, प्रदीप कुमार, विकास, पंकज कुमार और अमन कुमार समेत विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
निजी लाइसेंस पर विज का दो टूक रुख
गुरुग्राम-नूंह में समानांतर निजी बिजली कंपनी को लाइसेंस दिए जाने के मुद्दे पर विज ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ऊर्जा विभाग ने इस प्रस्ताव का शुरू से विरोध किया है और वे खुद भी इसके विरोध में हैं। उनके स्तर से विभाग की आपत्ति वाली फाइल को मंजूरी दिए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी। उन्होंने कहा कि एचईआरसी स्वायत्त संस्था है और लाइसेंस का आवेदन आयोग के समक्ष किया गया है। विज ने यह भी कहा कि इस मामले में अपील का विकल्प खुला है, क्योंकि वह इसके पक्ष में नहीं हैं।
एग्री डिस्कॉम पर घोषणा हुई, काम शुरू नहीं
एग्री डिस्कॉम को लेकर कर्मचारियों की आशंका पर विज ने कहा कि मुख्यमंत्री के बजट भाषण में इसकी घोषणा हुई थी, लेकिन अभी विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के साथ उनकी अभी कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। भविष्य में प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो हितधारकों से बातचीत की जाएगी।
स्मार्ट मीटर में प्रीपेड या पोस्टपेड का विकल्प
स्मार्ट मीटर को लेकर विज ने कहा कि फिलहाल नए स्मार्ट मीटरों की खरीद के लिए कोई टेंडर जारी नहीं हुआ है। साथ ही जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, उनके लिए प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प खुले रहेंगे। कर्मचारियों की संयुक्त एक्शन कमेटी ने इन्हीं तीन मुद्दों पर मिले आश्वासनों के बाद हड़ताल वापस ली।
बाकी मांगों पर भी सरकार ने बढ़ाई प्रक्रिया
कर्मचारियों की मांगों में केवल तीन बड़े नीतिगत मुद्दे ही नहीं थे। चारों बिजली निगमों में पदों के गठन और पुनर्सृजन का प्रस्ताव जल्द रेशनलाइजेशन कमीशन को भेजने के निर्देश विज ने दिए। उन्होंने प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी कराने को कहा। वहीं जूनियर इंजीनियर से नीचे के तकनीकी पदों को फिलहाल ऑनलाइन ट्रांसफर नीति से बाहर रखने के निर्णय पर यूनियनों ने मंत्री का आभार जताया।
डीसी रेट पर कार्यरत बिजली कर्मचारियों की वेतन वृद्धि के मुद्दे पर विज ने कहा कि उन्हें विभिन्न पदों के लिए एचकेआरएन के समानांतर रेट दिए जाने का मामला सरकार/मुख्य सचिव के पास भेजा जाए। जोखिम वाले काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिस्क भत्ते पर कमेटी बनेगी। इलेक्ट्रिसिटी भत्ते के मामले में देशभर के बिजली निगमों की व्यवस्था का अध्ययन कर अगली बैठक में रिपोर्ट रखी जाएगी।
ड्यूटी पर मौत में पांच साल की शर्त हटाने के निर्देश
ड्यूटी के दौरान मृत्यु या दुर्घटना की स्थिति में मिलने वाले एक्स-ग्रेशिया लाभ के लिए पांच साल की सेवा की शर्त हटाने के निर्देश भी विज ने दिए। अधिकारियों ने बताया कि इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। विभिन्न श्रेणियों में पदोन्नति रोस्टर रजिस्टर के अनुसार नियमों के तहत करने के निर्देश भी दिए गए।
जेई प्रमोशन कोटा 50 फीसदी करने की मांग
एचएसईवी डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन ने जूनियर इंजीनियरों की पदोन्नति में 35 प्रतिशत कोटा बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग रखी। विज ने इसका अध्ययन कराने और कर्मचारी प्रतिनिधियों से सुझाव लेने का भरोसा दिया। कैडर स्पेसिफिक एसीपी का मामला भी विभागीय आंतरिक कमेटी में भेजकर अध्ययन किया जाएगा।
मेडिकल कैशलेस और मेडिक्लेम सुविधा की मांग पर विज ने स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ बैठक कर बिजली कर्मचारियों की समस्या रखने का आश्वासन दिया। इस तरह कर्मचारियों की मुख्य मांगों पर तत्काल अंतिम फैसला भले नहीं हुआ, लेकिन हड़ताल टालने के लिए तीन विवादित मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट हुई और बाकी मांगों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भरोसा मिला।

