मनरेगा के मुद्दे पर सड़कों पर उतरेगी हरियाणा कांग्रेस
कल भिवानी और जींद में धरना, राष्ट्रपति के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मूल स्वरूप में प्रस्तावित बदलावों को लेकर हरियाणा कांग्रेस ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसे अधिकार-आधारित कानून को कमजोर कर ग्रामीण मजदूरों से उनका संवैधानिक हक छीनना चाहती है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह का कहना है कि मनरेगा को नए कानून ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी जीरामजी से बदलने का प्रस्ताव ग्रामीण भारत के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव मांग आधारित रोजगार व्यवस्था को समाप्त कर उसे सरकारी नियंत्रण और बजटीय सीमाओं में जकड़ देगा, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और असंगठित श्रमिकों को होगा।
राव नरेंद्र सिंह ने बताया कि 31 जनवरी से 6 फरवरी तक प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत धरना-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 5 फरवरी को भिवानी में सुबह 11 बजे और जींद में दोपहर 1 बजे धरना दिया जाएगा। इस दौरान उपायुक्तों के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि मनरेगा कोई सामान्य सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए कानूनी अधिकार है, जिसने वर्षों तक 100 दिनों के गारंटीड रोजगार की सुरक्षा दी।
उन्होंने सवाल उठाया कि नए कानून में 125 दिन रोजगार देने के दावे के बावजूद, यदि काम मांगने का अधिकार, समय पर भुगतान और स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्य की स्वतंत्रता खत्म हो जाती है, तो यह बढ़ोतरी केवल कागजी साबित होगी। उन्होंने चेताया कि यदि केंद्र सरकार ने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

