Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

Haryana Budget Session 2026 : हरियाणा हाउसिंग बोर्ड खत्म, एचएसवीपी में हुआ विलय; CM के प्रस्ताव पर विपक्ष ने जताई आपत्ति

लॉटरी सिस्टम, गरीबों के आवास और कर्मचारियों के भविष्य पर टकराव

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

Haryana Budget Session 2026 : हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन शहरी विकास के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। राज्य सरकार ने हरियाणा आवासन बोर्ड को भंग कर उसका विलय हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में करने का प्रस्ताव सदन में पेश किया, जिसे हंगामे के बीच पारित कर दिया गया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकारी संकल्प पेश करते हुए कहा कि आवासन बोर्ड और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के कार्य लगभग समान थे, इसलिए प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और शहरी योजनाओं के बेहतर एकीकरण के लिए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बोर्ड के कर्मचारियों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे और किसी की नौकरी नहीं जाएगी।

Advertisement

विपक्ष ने इस फैसले को गरीबों और मध्यम वर्ग के हितों के खिलाफ बताते हुए तीखा विरोध किया। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कौन-सा फेलियर रहा, जिसके चलते सरकार को बोर्ड को भंग करने की जरूरत पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि सेक्टरों में प्लॉट आवंटन के लिए लॉटरी सिस्टम बंद होने से आम आदमी की पहुंच खत्म हो गई है और अब यह व्यवस्था प्रॉपर्टी डीलरों तक सीमित होती जा रही है।

Advertisement

कांग्रेस विधायक बीबी बत्तरा ने कहा कि प्रस्ताव की पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं की गई। इस पर विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने कहा कि विवरण पोर्टल पर उपलब्ध है। बेरी विधायक डॉ़ रघुबीर सिंह कादियान ने हाउसिंग बोर्ड को बहाल रखने की मांग करते हुए कहा कि यह गरीबों के लिए आवास उपलब्ध कराने का माध्यम रहा है।

वहीं झज्जर विधाकय गीता भुक्कल ने तर्क दिया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण मुख्यतः शहरी क्षेत्रों तक सीमित है, जबकि हाउसिंग बोर्ड ग्रामीण इलाकों में भी आवासीय कॉलोनियां विकसित करता रहा है। मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट किया कि बोर्ड को समाप्त नहीं, बल्कि एचएसवीपी में मर्ज किया गया है। इससे दो समान प्रकृति की संस्थाओं के बीच तालमेल की समस्या खत्म होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

Advertisement
×