हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र : पेंशन पर हंगामा, केहरवाला–बेदी आमने-सामने
सीएम सैनी बोले, विपक्ष ने पाप किया, किसी बुजुर्ग की पेंशन नहीं काटी
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को बुढ़ापा और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन का मुद्दा सदन में गूंज उठा। जैसे ही कालांवाली से कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला ने सरकार पर बड़ी संख्या में पेंशन रोकने के आरोप लगाए, सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। मामला इतना गरमा गया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा।
केहरवाला ने कहा कि हजारों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन वेरिफिकेशन के नाम पर रोक दी गई है, जबकि कई वास्तविक लाभार्थियों को बिना किसी गलती के इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने 2024 के बाद रोकी गई पेंशन का विस्तृत ब्यौरा सदन में मांगा।
सरकार की ओर से कहा गया कि शिकायतों की जांच करवाना सरकार की जिम्मेदारी है और आगे भी यदि कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच की जाएगी।
मंत्री बेदी ने रखा पूरा डेटा
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने आरोपों का जवाब देते हुए सदन में संपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि 1,01,452 लाभार्थियों की पेंशन उनकी मृत्यु के बाद बंद की गई, जबकि 9,668 मामलों में जिला समाज कल्याण अधिकारियों की रिपोर्ट और शिकायतों के आधार पर पेंशन रोकी गई है।
अगस्त 2024 से जनवरी 2026 के बीच बंद की गई पेंशन का पूरा ब्योरा भी उन्होंने सदन में रखा। बेदी ने कहा कि वे पूरा डेटा पढ़कर सुनाएंगे, क्योंकि विपक्ष मीडिया में भ्रम फैलाता है और जनता को वास्तविक स्थिति जाननी चाहिए। इस पर केहरवाला ने आपत्ति जताते हुए कहा कि लिखित डेटा मिलने के बाद उसे पढ़ने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन मंत्री अपने जवाब पर अड़े रहे।
बुजुर्ग हमारे पिता समान, विपक्ष ने झूठ फैलाया
हंगामा बढ़ने पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खड़े हुए और विपक्ष पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग हमारे पिता समान हैं और मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार बुजुर्गों का सबसे अधिक सम्मान करती है। विपक्ष ने पेंशन को लेकर अफवाह फैला कर पाप किया है। किसी भी बुजुर्ग की पेंशन नहीं काटी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील है और 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्गों को 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने दोहराया कि यदि किसी मामले में शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा जवाब देना चाहते थे, लेकिन स्पीकर ने उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी। इससे विपक्ष में और नाराजगी बढ़ गई।
इसलिए हुआ सदन में टकराव
विपक्ष का आरोप था कि सरकार वेरिफिकेशन के नाम पर जानबूझकर बड़ी संख्या में पेंशन रोक रही है।
वहीं सरकार का दावा है कि पेंशन काटी नहीं गई, बल्कि मृत्यु या अयोग्यता के आधार पर नियमानुसार बंद की गई हैं। साथ ही बड़ी संख्या में नए लाभार्थियों को पेंशन दी जा रही है, इसलिए कटौती का आरोप निराधार है।
विपक्ष ने इसे जनता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सवाल उठाए, जबकि सत्तापक्ष ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति का उद्देश्य लाभार्थियों को परेशान करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।

