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Haryana Assembly 2026 : स्पीकर ने खारिज किया हुड्डा का जवाब, ‘समानांतर विधानसभा’ विवाद फिर गरमाया

कहा- स्पष्टीकरण में तथ्यों की जगह आरोप, संवैधानिक आधार का नहीं दिया जवाब ,कांग्रेस के ‘मॉक सत्र’ को बताया सदन की गरिमा के खिलाफ कदम

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27 अप्रैल को हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान पार्किंग एरिया में विपक्ष द्वारा आयोजित मॉक सत्र।
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Haryana Assembly 2026 : हरियाणा विधानसभा परिसर में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘समानांतर विधानसभा’ के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा आमने-सामने आ गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने हुड्डा की ओर से भेजे गए स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए कहा है कि जवाब न केवल अस्पष्ट और तथ्यहीन है, बल्कि उसमें संवैधानिक व संसदीय सवालों का कोई सीधा उत्तर भी नहीं दिया गया।

अध्यक्ष ने इसे असंतोषजनक बताते हुए साफ किया कि उनके द्वारा उठाए गए मूल प्रश्न अब भी अनुत्तरित हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि 27 अप्रैल को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक दल द्वारा परिसर में आयोजित समानांतर सत्र को लेकर तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था।

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इनमें समानांतर सत्र का संवैधानिक आधार, विशेष सत्र को असंवैधानिक बताने का औचित्य और नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में पारित प्रस्ताव पर कांग्रेस की आपत्तियां शामिल थीं। उनके अनुसार नेता प्रतिपक्ष के जवाब में इन तीनों मुद्दों पर कोई स्पष्ट और तथ्यात्मक उत्तर नहीं दिया गया। इसके बजाय पत्र में आरोप, अनुमान और भ्रामक तर्क पेश किए गए हैं।

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‘निंदा प्रस्ताव’ वाला तर्क बताया पूरी तरह निराधार

हरविंद्र कल्याण ने कांग्रेस के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें विशेष सत्र को कथित ‘निंदा प्रस्ताव’ से जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव न तो बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) के एजेंडे में था और न ही सदन में प्रस्तुत किया गया था। अध्यक्ष के अनुसार ऐसे में कांग्रेस द्वारा विशेष सत्र का बहिष्कार करना तथ्यात्मक रूप से गलत और पूर्व नियोजित राजनीतिक कदम प्रतीत होता है।

‘राज्यपाल ने विधिवत बुलाया था विशेष सत्र’

स्पीकर ने स्पष्ट किया कि 27 अप्रैल का विशेष सत्र संविधान के अनुच्छेद-174 के तहत राज्यपाल द्वारा विधिवत आहूत किया गया था। सत्र की समस्त कार्यवाही नियमों, संवैधानिक प्रावधानों और स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुरूप हुई। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल की असहमति या विरोध से कोई संवैधानिक सत्र असंवैधानिक नहीं हो जाता। सदन की कार्यवाही को संविधान के अनुच्छेद-194 के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त है।

‘मीडिया ब्रीफिंग क्षेत्र को बनाया मॉक विधानसभा का मंच’

विधानसभा अध्यक्ष ने सबसे कड़ी आपत्ति परिसर में आयोजित समानांतर गतिविधियों पर जताई। उन्होंने कहा कि निर्धारित मीडिया ब्रीफिंग क्षेत्र का इस्तेमाल बिना अनुमति ‘मॉक विधानसभा’ चलाने के लिए किया गया। वहां कांग्रेस विधायकों ने अध्यक्ष और मंत्रियों जैसी भूमिकाएं निभाईं तथा विधिवत चल रहे विधानसभा सत्र को असंवैधानिक घोषित करने का प्रयास किया। उनके मुताबिक यह कदम संसदीय परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रतिकूल था तथा इससे विधानसभा की गरिमा और संस्थागत प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।

नारी शक्ति वंदन प्रस्ताव पर भी कांग्रेस के आरोप खारिज

स्पीकर ने कहा कि विशेष सत्र में पारित सरकारी प्रस्ताव का उद्देश्य केवल नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में सदन की सामूहिक भावना व्यक्त करना था। इसका सीटों में वृद्धि, परिसीमन, लोकसभा की संरचना या संसद के अधिकार क्षेत्र से जुड़े किसी मुद्दे से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों पर नहीं बल्कि अनुमानों पर आधारित हैं।

‘लोकतंत्र में विरोध का अधिकार, लेकिन मर्यादा भी जरूरी’

हरविंद्र कल्याण ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने दोहराया कि नेता प्रतिपक्ष का जवाब संसदीय और कानूनी तथ्यों के बजाय आरोपों पर आधारित है, इसलिए उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। करीब दो महीने पुराने इस विवाद पर विधानसभा अध्यक्ष की ताजा टिप्पणी से स्पष्ट है कि ‘समानांतर विधानसभा’ प्रकरण अभी राजनीतिक और संसदीय बहस का विषय बना रहेगा।

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