Gangster Network Crackdown: नशा तस्करों की संपत्ति अटैच होगी, जरूरत पड़ी तो ध्वस्तीकरण भी
डीजीपी अजय सिंघल ने पुलिस अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश; सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, तस्करों के पूरे नेटवर्क और वित्तीय स्रोतों पर होगा प्रहार
Gangster Network Crackdown: हरियाणा पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रखने के बजाय उनके पूरे नेटवर्क और अवैध कमाई के स्रोतों पर प्रहार करने की रणनीति पर जोर दिया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अजय सिंघल ने गुरुवार को पुलिस मुख्यालय, पंचकूला में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की समीक्षा बैठक में नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें नियमानुसार अटैच करने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में संगठित नशा तस्करी गिरोहों, गैंगस्टर नेटवर्क, फिरौती की धमकियों, सीसीटीवी निगरानी, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों की भी समीक्षा की गई।
संपत्ति और वित्तीय नेटवर्क पर चोट
डीजीपी ने कहा कि नशे को जड़ से समाप्त करना हरियाणा पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सभी जिलों को गंभीरता और सक्रियता से काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नशा तस्करों द्वारा अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों की पहचान की जाए और उन्हें कानून के मुताबिक अटैच करने की कार्रवाई की जाए। जहां कानूनी प्रक्रिया के तहत ध्वस्तीकरण संभव हो, वहां आवश्यक कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल तस्करों को गिरफ्तार करने से नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लगेगी। इसके लिए तस्करी के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों और अवैध कमाई के रास्तों की पहचान जरूरी है।
संगठित गिरोहों पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की नजर
हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की पुलिस अधीक्षक सृष्टि गुप्ता ने नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर प्रस्तुति दी। इसमें एनडीपीएस एक्ट के तहत जांच, कमर्शियल क्वांटिटी के मामलों, संगठित नशा तस्करी गिरोहों की पहचान और के-9 डॉग स्क्वॉड की मदद से नशे की बरामदगी से जुड़ी जानकारी साझा की गई। एचएसएनसीबी के प्रमुख एवं एडीजीपी संजय कुमार ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि नशे के उत्पादन, तस्करी और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसे तोड़ने पर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने बताया कि एएनटीएफ की कार्यप्रणाली की शीघ्र समीक्षा की जाएगी और जिला स्तर पर उसके प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।
गैंगस्टरों के संपर्क और जेल नेटवर्क की निगरानी
डीजीपी ने गैंगस्टर नेटवर्क और फिरौती की धमकियों के मामलों में भी प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अपराधियों के संपर्कों, युवाओं की भर्ती के तरीकों और आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे संचार माध्यमों का विश्लेषण करने को कहा। जेलों में बंद अपराधियों के बीच होने वाले संपर्कों पर भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस को संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर ऐसे संपर्कों के जरिए बाहर संचालित हो रहे आपराधिक नेटवर्क को रोकने के लिए कदम उठाने को कहा गया।
1.25 लाख सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क
अपराध नियंत्रण और जांच में सीसीटीवी की भूमिका को देखते हुए डीजीपी ने निगरानी तंत्र और मजबूत करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक करीब 1.25 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। होटल, ज्वेलरी शॉप, बैंक, आरडब्ल्यूए, बाजार और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सड़क की ओर कैमरे लगाने के लिए संबंधित संस्थानों के साथ समन्वय करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य आपराधिक घटनाओं के बाद संदिग्धों की पहचान और जांच में पुलिस को अधिक प्रभावी साक्ष्य उपलब्ध कराना है।
महिला और बाल सुरक्षा भी एजेंडे में
बैठक में महिलाओं के खिलाफ अपराध, गुमशुदा बच्चों की तलाश, धरना-प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और अन्य संवेदनशील मामलों की भी समीक्षा की गई। डीजीपी ने अधिकारियों को इन मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करने तथा किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पहले से प्रभावी कार्ययोजना तैयार रखने के निर्देश दिए।

